दिनकर की कविताओं ने जगाई राष्ट्रीय चेतना, आरडीएस कॉलेज में हुआ काव्य-वाचन

  • Post By Admin on Sep 23 2026
दिनकर की कविताओं ने जगाई राष्ट्रीय चेतना, आरडीएस कॉलेज में हुआ काव्य-वाचन

मुजफ्फरपुर : राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती के अवसर पर रामदयालु सिंह महाविद्यालय के स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग की ओर से बुधवार को ‘एक दिन राष्ट्रकवि दिनकर के साथ’ विषय पर काव्य-वाचन एवं चर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने दिनकर की चर्चित रचनाओं का पाठ करते हुए उनके साहित्यिक योगदान और विचारों पर चर्चा की।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं राष्ट्रकवि दिनकर के चित्र पर माल्यार्पण से हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. शशिभूषण कुमार ने की, जबकि संचालन हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने किया। इस दौरान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने दिनकर की चुनिंदा रचनाओं का काव्य-पाठ किया। इनमें ‘कृष्ण की चेतावनी’ (रश्मिरथी), ‘हाहाकार’, ‘परिचय’, ‘किसको नमन करूं मैं’, ‘कलम आज उनकी जय बोल’ और ‘अर्द्धनारीश्वर’ सहित अन्य कविताएं शामिल रहीं।

हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. रमेश प्रसाद गुप्ता ने दिनकर को कालजयी एवं जनता का कवि बताया। उन्होंने कहा कि उनकी कविताएं वर्षों बाद भी जनमानस में जीवंत हैं। दिनकर ने हिन्दी साहित्य को विस्तार देने के साथ हिन्दी भाषा की अभिव्यक्ति क्षमता को भी समृद्ध किया। उन्होंने युवा पीढ़ी से भारत को समग्रता में समझने के लिए दिनकर की पुस्तक ‘संस्कृति के चार अध्याय’ पढ़ने की अपील की। विभाग के युवा प्राध्यापक डॉ. नीरज कुमार मिश्र ने कहा कि दिनकर की कविताओं में शोषित और वंचित वर्ग को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का संदेश दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि स्वाधीनता आंदोलन के अंतिम चरण में दिनकर ने अपनी रचनाओं में प्रगतिशील विचारों को स्थान देकर हिन्दी को व्यापक राष्ट्रीय अभिव्यक्ति का माध्यम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य प्रो. शशिभूषण कुमार ने दिनकर के जीवन-संघर्ष और व्यक्तित्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अभावों और संघर्षों के बीच दिनकर का व्यक्तित्व उसी तरह निखरा, जैसे आग में तपकर सोना कुंदन बनता है। वे ओज, तेज और स्वाधीनता की भावना से ओतप्रोत जनप्रिय कवि थे। उन्होंने तत्कालीन गुलामी से मुक्ति के लिए राष्ट्रीय चेतना के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके साहित्यिक योगदान और रचनाओं को भुलाया नहीं जा सकता।

काव्य-पाठ में रसायन विभाग की प्राध्यापिका डॉ. अम्बिका श्रीवास्तव और डॉ. आशिष कुमारी कान्ता के साथ छात्र-छात्राओं संगीता कुमारी, सुल्ताना प्रवीण, सोनाक्षी प्रिया, कोमल कुमारी, प्रियंका कुमारी, दुर्गा कुमारी, साक्षी कुमारी, रौशनी कुमारी, स्नेहा श्री, हिना कुमारी, किरण कुमारी, दीपा कुमारी, अंकित कुमार और विवेक कुमार सहित अन्य विद्यार्थियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का धन्यवाद-ज्ञापन हिन्दी विभाग की युवा प्राध्यापिका डॉ. दिव्या ने किया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के डॉ. रजनीकांत पाण्डेय, डॉ. सौरभ राज, डॉ. ललित किशोर, डॉ. हसन रजा, डॉ. श्रुति मिश्र, डॉ. प्रियंका दीक्षित, डॉ. आयेशा जमाल, डॉ. सुमनलता, डॉ. आरती, डॉ. अमृता, डॉ. बिन्दु, डॉ. प्रेमलता, डॉ. भगवान कुमार, डॉ. सूरज कुमार, डॉ. आमोद सिंह, डॉ. सी.के. झा, डॉ. चौधरी संजय, डॉ. अमर ज्योति रंजन और डॉ. अंजनी कुमार शुक्ला सहित कई प्राध्यापक-प्राध्यापिकाएं मौजूद रहीं।