विविध समाचार

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स्वतंत्रता दिवस और सोशल डिस्टेंसिंग
  • Post by Admin on Aug 14 2020

आज आजादी के मायने बदलने लगे हैं Iजब आजादी नहीं थी तो उसके मिलने का इंतजार था और उससे जुड़े सपने थे Iअब उसके मायने हैं Iयह मायने क्यों हैं? यदि आज हम संसदीय राजनीति के सन्दर्भ में पीछे मुड़ कर देखते हैं तो लगता है कि 1952 से अब तक कुछ खास दूरी तय नहीं हुई हैI गाँव से लेकर शहर तक हर जगह तिरंगा फहराया जाता है, मिठाइयाँ बाटी जाती हैं Iदेश इस साल भी आजादी के जश्न में लिप्त होगा मगर एक नए अंदाज में Iइस स   read more

पतंगबाजी के वो दिन
  • Post by Admin on Aug 14 2020

पड़ोस के शर्मा  जी से जब मैंने उनके पतंगबाजी के दिनों के बारे में पूछा तो वे एकटक ही आसमान में उड़ती उस पतंग को निहारने लगे जो कुछ देर पहले ही मांझे से अलग हो कर हवा में झूल रही थी I शर्मा जी अपने दिनों को याद करते हुए कहने लगे हमारे ज़माने में पतंगे उड़ती ही नहीं राणा प्रताप के घोड़े की तरह हवा से बातें करती थी I यह आज कल के नौजवान क्या जाने पतंग उड़ाना I सोशल मीडिया ने इस हुनर पर पानी फेर दिया ह   read more

पुलिस शब्द ही है स्त्रीलिंग 
  • Post by Admin on Aug 03 2020

पुलिस शब्द ही स्त्रीलिंग है,  तो तुम पौरुष पुलिस में कहाँ ढूंढते हो? हाँ,हाँ ठीक कहा तुमने  है पौरुष पुलिस में  मैं भी देखता हूँ कभी -कभी ! अशिक्षितों पर शिक्षा की धाक जमाते, मूर्खों को कानून का पाठ पढ़ाते,  भोली-भाली जनता को आहार बनाते  हाँ,यहाँ पौरुष दिखाई देता है उनमें ! हाँ, हाँ ठीक कहा तुमने,  इनका पौरुष झूकता है बेइमानों के सामने, दलालों के स   read more

मैं चलता रहा हाँ चलता रहा
  • Post by Admin on Aug 03 2020

मैं चलता रहा मृगतृष्णा सा हो  चला है मन , न जाने किस  की खोज में  भटक रहा  उपवन उपवन ! व्याकुल होकर  आतुर होकर, हर रिश्ते से जा दूर होकर ! मैं चलता रहा बस चलता रहा, अब नींद से  काफूर हो कर ! नगरे नगरे  द्वारे द्वारे,  भटक रहा  मारे मारे ! अंधियारे से  उजियारे से, छाए बदरा कारे कारे से ! खुद से ही  खुद को ढूंढ रहा,   read more

बहुत काम की है आयुर्वेदिक पद्धति
  • Post by Admin on Aug 03 2020

प्राचीन समय में जब आधुनिक एलोपैथी नहीं होती थी उस समय बिरवा पद्धति तथा पेड़-पौधों पर आधारित चिकित्सा बहुत कारगर थी। चरक संहिता, सुश्रुत संहिता जैसे ग्रंथों में स्वस्थ जीवन जीने के तरीके बताए गए हैं वहीं विभिन्न पेड़-पौधों का भी उल्लेख मिलता है जो दवा के रूप में प्रयोग किए जा सकते हैं। वैसे तो लाखों प्रकार के पौधे पूरे संसार में पाए जाते हैं किंतु अकेले भारतवर्ष में करीब 45000 प्रकार   read more

नागरी लिपि: शक्ति, सीमाएँ और संभावनाएँ
  • Post by Admin on Aug 03 2020

भारतवर्ष में प्रचलित अन्य दूसरी लिपियों की श्रेणी में नागरी लिपि का स्थान सर्वोपरि माना गया है। यद्यपि नागरी के साथ-साथ उर्दू, कैथी, मुड़िया, मैथिली आदि अनेक लिपियों का भी यल्किंचित् व्यवहार होता है, तथापि लिखाई के अतिरिक्त छपाई में तो अधिकतर नागरी लिपि ही व्यवहत होती है। नागरी लिपि केवल अरबी, फारसी अर्थात् उर्दू-लिपि से ही भिन्न है। भारतीय लिपियों में सबसे अधिक प्रचलित नागरी   read more

परमात्मा का हाथ सत्कर्मों के साथ
  • Post by Admin on Aug 03 2020

परमात्मा का हाथ सत्कर्मों के साथ मानव शरीर मात्र एक ऐसा चोगा है जिसमे परमात्मा द्वारा रचित आत्मा निवास करती है। यह जीवात्मा एक निश्चित समय तक एक चोगे में रह समय पूर्ण होने पर उस चोगे से स्वतंत्र हो जाती है जिसे मानवरूपी चोगे की मृत्यु होना कहते हैं। तथा सही समय आने पर वह जीवात्मा वापस एक नया चोगा ग्रहण करती है। अर्थात केवल मानव शरीर ही नश्वर है, जीवात्मा तो अजर अमर है। जब मानव शर   read more

भारत के जवान
  • Post by Admin on Aug 03 2020

भारत के जवान मनें शहादत के लिए, खड़े किए हैं जो लाल ! आज राजनीति मिलकर, कर रही क्यों बवाल ! वो बेटा जो इकलौता है, छोड़कर अपनी जननी ! जन्मभूमि के लिए खड़ा है, वो तपती रेत में अड़ा है ! वो नसें फट जाए ऐसे,  ठंडे सियाचीन में खड़ा है ! हमारे उस लाल को; कुछ दे न सको अगर ! एक दुआ जीवन की, और सलाम उसके आने पर ! हाथ खोल दो अब उसके, वतन की सीमाओं पर ! जिसस   read more

मुल्क में हो अमन ऐसा अधिकार चाहिए
  • Post by Admin on Aug 03 2020

तख्त-ओ ताज हमको कहां सरकार चाहिए, सिफारिशों से कहां हमको ऊंचा दरबार चाहिए। कितने दिनों रहोगे साहिबे मसनद तुम, मुल्क में हो अमन ऐसा अधिकार चाहिए।   सरपरस्ती में कटवा ले जो अपना सर, हम सबको ऐसा ही एक सरदार चाहिए। सुबह हैरतजदा खबर सुनने को मिलेगी, नहीं अब हमको झूठा अखबार चाहिए।   हो हेतराम गर शरीयत के कानून का, मुल्क के नौजवानों को रोजगार चाहिए। &nbs   read more

कोरोना और बहनें- रक्षाबंधन
  • Post by Admin on Aug 01 2020

नई दिल्ली : हर साल अगस्त के महीने में भाई-बहनों का सबसे पवित्र त्यौहार आता है, जिसका नाम है रक्षाबन्धन। इस साल कोरोना के चलते सभी त्योहारों के मानो जैसे रंग ही उड़ गये हैं। लोग अपने- अपने घरों में कैद हैं। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम घर से चीजों का आनंद नहीं ले सकते। समय आज खराब है, कल अच्छा भी होगा। कोरोना आया है तो जाएगा  भी, लेकिन इसके चलते हमें अपने त्योहारों को नहीं भूलन   read more