विविध समाचार

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अगले तीन दशक में 21.6 करोड़ लोग हो जाएंगे देश से पलायन को मजबूर
  • Post by Admin on Sep 18 2021

विश्व बैंक की आज जारी हुई ग्राउंड्स वेल रिपोर्ट में पाया गया है कि जलवायु परिवर्तन दुनिया भर में लोगों के विस्थापन का एक बड़ा कारण बनता जा रहा। इस बात की गम्भीरता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2050 तक दुनिया के छह विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले 21 करोड़ 60 लाख लोगों को अपने-अपने देश छोड़ने को मजबूर कर सकता है जलवायु परिवर्तन। वैसे, जलवायु के कारण आंतरिक रूप से पलायन का सि   read more

करोड़ों रुपए की बर्बादी का सबब बन सकता है कोयला बिजली संयंत्र
  • Post by Admin on Sep 07 2021

भारत में पहले से ही अनुमति प्राप्‍त और हाल में ही इजाजत पाए नए कोयला बिजली संयंत्र अब देश की बिजली सम्‍बन्‍धी जरूरतों के लिहाज से फालतू बन गए हैं। साथ ही, ये पॉवर प्‍लांट वर्ष 2030 तक 450 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा उत्‍पादन के बहु-प्रशंसित लक्ष्‍य की प्राप्ति की सम्‍भावनाओं को खतरे में डाल सकते हैं। ये संयंत्र जिंदा लाश (जॉम्‍बी) जैसे हैं जो न तो जिंदा होंगे और न ही सही मायने में मरेंगे।   read more

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष दे रहीं जीवाश्म ईंधन को विस्तार से बढ़ावा
  • Post by Admin on Aug 30 2021

ताज़ा मिली जानकारी के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पेरिस समझौते के बाद से अपने आधे से अधिक सदस्य देशों को जीवाश्म ईंधन के बुनियादी ढांचे का विस्तार करने के लिए प्रेरित किया है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष या इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) की ऐसी सलाह से वैश्विक जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति का रास्ता काफी कमज़ोर भी हुआ है। इस जानकारी का ख़ुलासा हुआ है एक्शनऐड और ब्   read more

केंद्रीय बैंक हमारी अर्थव्यवस्था के हैं रेफरी: रिपोर्ट
  • Post by Admin on Aug 30 2021

दुनिया के सबसे बड़े केंद्रीय बैंकों में से 12 बैंक अब भी नीति तथा प्रत्यक्ष निवेश के जरिए जीवाश्म ईंधन का कर रहे हैं सहयोग  जीवाश्म ईंधन के कारोबार से पूंजी का सहारा हटाने में केंद्रीय बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। दुनिया के अनेक केंद्रीय बैंकों ने 'नेटवर्क फॉर ग्रीनिंग द फाइनेंशियल सिस्टम' पर दस्तखत किए हैं। इसमें जलवायु परिवर्तन द्वारा वित्तीय स्थायित्व प   read more

वैश्विक बिजली क्षेत्र का कार्बन उत्सर्जन का बढ़ा स्तर
  • Post by Admin on Aug 30 2021

साल 2021 की पहली छमाही में बढ़ती वैश्विक बिजली की मांग ने स्वच्छ बिजली में वृद्धि को पीछे छोड़ दिया, जिसकी वजह से उत्सर्जन-गहन कोयला शक्ति में वृद्धि हुई है और नतीजतन, वैश्विक बिजली क्षेत्र का कार्बन उत्सर्जन, महामारी से पहले के स्तर से बढ़ गया, यह कहना है एनर्जी थिंक टैंक एम्बर द्वारा आज प्रकाशित एक रिपोर्ट से का। इस रिपोर्ट पर एम्बर के वैश्विक प्रमुख डेव जोन्स कहते हैं, "2021 मे   read more

विनाशकारी बाढ़ का नतीजा बना जलवायु परिवर्तन
  • Post by Admin on Aug 30 2021

जलवायु वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम द्वारा एक रैपिड एट्रिब्यूशन अध्ययन में पाया गया है कि जलवायु परिवर्तन ने अत्यधिक वर्षा की घटनाओं की संभावना को 1.2 से 9 गुना अधिक बढ़ा दिया है।  हाल ही में जर्मनी, बेल्जियम और पड़ोसी देशों में पिछले महीने आयी विनाशकारी बाढ़ इसी का नतीजा है। रैपिड एट्रिब्यूशन अध्ययन में यह भी पाया गया कि इस क्षेत्र में इस तरह की वर्षा अब मानव जनित वार्मिंग   read more

भारत ने दिखाया नेतृत्व: किगाली संशोधन को मिली मंजूरी
  • Post by Admin on Aug 30 2021

  मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल में किगाली संशोधन हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (एचएफसी) की खपत और उत्पादन को धीरे-धीरे कम करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है। इस प्रोटोकॉल में अकेले सदी के अंत तक वातावरण के 0.5 डिग्री गर्म होने से बचने की क्षमता है। डॉ सीमा जावेद  जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ वैश्विक जंग में एक बार फिर भारत ने नेतृत्व दिखाते   read more

भारत में हुई 100 GW रिन्यूबल ऊर्जा क्षमता स्थापित
  • Post by Admin on Aug 30 2021

देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को लाल किले से दिए अपने भाषण में जहाँ तमाम महत्वपूर्ण घोषणाएं की, उनमें सबसे ख़ास रही राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन की स्थापना की घोषणा, जिसके अंतर्गत भारत को ग्रीन हाइड्रोजन का नया वैश्विक केंद्र बनाने के प्रयास होंगे। इसी के साथ उन्होंने वर्ष 2047 तक भारत को ऊर्जा क्षेत्र में स्वतंत्र बनाने का लक्ष्य भी त   read more

खतरा: पृथ्वी टिपिंग पॉइंट्स के करीब
  • Post by Admin on Aug 30 2021

आईपीसीसी की ताज़ा रिपोर्ट ‘कोड रेड’ के बाद आज ग्‍लोबल कॉमंस अलायंस ने द ग्लोबल कॉमन्स सर्वे: एटिट्यूड टू प्लेनेटरी स्टीवर्डशिप एंड ट्रांसफॉर्मेशन अमंग जी20 कंट्रीज़ नाम की एक रिपोर्ट जारी की है।  दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍थाओं वाले 20 देशों के 73 फीसद लोग मानते हैं कि इंसान की हरकतों की वजह से दुनिया एक अपूरणीय क्षति के मुहाने पर पहुंच रही है। सर्वेक्षण में यह भी   read more

मॉनसून वर्षा में कमी की वजह बन रहा वायु प्रदर्शन
  • Post by Admin on Aug 30 2021

जहाँ अब तक वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य और आर्थिक प्रभावों को स्थापित किया गया है, वहां अब ताज़ा अनुसंधान और विशेषज्ञ बताते हैं कि वायु प्रदूषण अब भारत में मानसून की वर्षा को भी प्रभावित कर रहा है। ‘एंथ्रोपोजेनिक एरोसोल्स एंड द वीकनिंग ऑफ द साउथ एशियन समर’ नाम की एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़, वायु प्रदूषण मानसून को अनियमित वर्ष   read more