विविध समाचार

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आचार्य श्री के स्मारक पर आकर हम स्वयं को धन्य करते हैं : डॉ. संजय पंकज
  • Post by Admin on Jan 07 2021

मुजफ्फरपुर: गुरुवार को जिले के रामबाग स्थित निराला निकेतन में महवाणी स्मरण का आयोजन किया गया। इस दौरान वहां उपस्थित अतिथिगणों ने आचार्य श्री को स्मरण करते हुए उनके कृतियों का व्याख्यान किया तथा काव्यपाठ भी किया। इस दौरान कवि गीतकार और बेला के संपादक डॉ. संजय पंकज ने आचार्य श्री को स्मरण करते हुए कहा कि आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री के स्मारक पर आकर हम स्वयं को धन्य करत   read more

पुलिसकर्मी व सैनिक ही हैं देश के असली हीरो
  • Post by Admin on Jan 07 2021

आप मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया से मरीन ड्राइव होते हुए ब्रांद्रा और जुहू की तरफ जब बढ़ते हैं तब शुरू में ही, सड़क के बायीं तरफ एक धड़ प्रतिमा को देखते हैं। हालांकि पता नहीं चलता कि यह किस शख्स की है। हां, इतना समझ आ जाता है कि प्रतिमा में जिस इंसान को दिखाया गया है वह कोई पुलिसकर्मी ही रहा होगा। प्रतिमा में दिखाया गया शख्स पुलिस की वर्दी में है। आप जरूर जानना चाहेंगे कि वह कौन है? आपको आ   read more

जा रहा हूँ , मैं हूं साल 2020
  • Post by Admin on Dec 27 2020

मुजफ्फरपुर : श्री नवयुवक समिति के साभागार में आज नटवर साहित्य परिषद की ओर से मासिक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया ।  कार्यक्रम की अध्यक्षता पं. नागेन्द्र नाथ ओझा ने तथा मंच संचालन नटवर साहित्य परिषद के संयोजक डॉ. नर्मदेश्वर प्रसाद चौधरी ने किया । कवि सम्मेलन की शुरुआत आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री की गीत से किया गया जिसकी प्रस्तृति डॉ विजय शंकर मिश्र ने किया । इसके बाद डॉ. नर्मदे   read more

आचार्य श्री का लेखन है चुनौतीपूर्ण : डॉ. संजय पंकज
  • Post by Admin on Dec 07 2020

महाकवि आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री के साहित्य का फैलाव क्षितिज की तरह है जिस को पकड़ने के लिए जितना ही हम आगे बढ़ते हैं वह और और फैलता दूर होता चला जाता है। हम साहित्य की जिस विधा में चर्चा करना चाहें आचार्यश्री का लेखन अनुलंघ्य हिमालय की तरह लगता है।--यह बातें निराला निकेतन में आयोजित महावाणी स्मरण में बेला पत्रिका के संपादक डॉ संजय पंकज ने कही ।  डॉ पंकज ने आगे कहा कि आचार्य ज   read more

जिन्दगी का सबसे कड़वा जहर पीकर लिखी गई मधुशाला
  • Post by Admin on Nov 26 2020

सूर्यगढ़ा : मधुशाला, मधुबाला और मधुकलश के मदमस्त कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन की 113 वीं जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित एक समारोह में प्रखण्ड के साहित्यकारों ने उन्हें कविता को जीने वाला कवि बताया। बच्चन जी हिन्दी के ऐसे कवि रहे जिन्होंने खुद कुछ नहीं लिखा, उनका जीवन जो कुछ उनसे लिखवाता गया, वे लिखते गए। जीवन के हर आघात पर, हर चोट पर उन्होंने कविता को ही पुकारा। लोगों के विरोध के बावजूद बच्   read more

जब कभी भी निराला निकेतन आता हूँ पवित्र हो जाता हूँ : डॉ. देवव्रत
  • Post by Admin on Nov 07 2020

मुुुजफ्फरपुर : बेला पत्रिका के तत्वावधान में आयोजित निराला निकेतन की महावाणी स्परण गोष्ठी में अध्यक्षता करते हुए अंग्रेजी,हिंदी के कवि डॉ देवव्रत अकेला ने कहा कि-' मैं जब कभी भी निराला निकेतन आता हूं पवित्र हो जाता हूं ।आचार्य जी के दर्शन करते हुए मुझे बराबर रचनात्मक प्रेरणा और ऊर्जा मिलती थी। यहां आने के बाद आज भी वही भाव मेरे भीतर उतरता है।शास्त्री जी कई भाषाओं के विद्वान थे औ   read more

अपने उदार व्यक्तित्व के कारण ही श्रीबाबू हुए विख्यात
  • Post by Admin on Oct 21 2020

मुजफ्फरपुर : डॉक्टर श्री कृष्ण सिंह सेवा समिति के तत्वावधान में बिहार केसरी डॉ श्रीकृष्ण सिंह के जयंती का आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉक्टर अशोक कुमार शर्मा के आवास पर संपन्न हुआ।श्रीबाबू के चित्र पर माल्यार्पण करने के बाद साहित्यकार और बेला पत्रिका के संपादक डॉ संजय पंकज की अध्यक्षता में विचार गोष्ठी का प्रारंभ हुआ जिसमें विषय प्रवेश कराते हुए डॉ अशोक शर्मा ने कहा कि श्री बाबू नि   read more

निराला निकेतन में महावाणी स्मरण का आयोजन
  • Post by Admin on Oct 07 2020

मुजफ्फरपुर: बुधवार को निराला निकेतन में बेला पत्रिका के तत्वावधान में आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री की स्मृति में मासिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कवि गीतकार डॉ. संजय पंकज, डॉ. देवव्रत अकेला, कवयित्री डॉ. कुमारी अनु, राम इकबाल सिंह राकेश स्मृति समिति के सचिव ब्रज भूषण शर्मा, पत्रकार राजकुमार ठाकुर, जय मंगल मिश्र आदि कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। इस दौरान सभी ने आचार   read more

मालजाल से माल तक
  • Post by Admin on Oct 06 2020

छुटपन में जब आँखें खुलीं , तब नाँद के सानी-पानी में थुथुन डुबाकर दाना-पानी के लिए रगड़ा करते बैल , मोटी चितकबरी भैंस , गाय और उनके बछड़ों जैसे 'मालजाल' के बीच खुद को पाया ! उनके गले में मंदिर की सबसे छोटी घंटी के समान बंधी टुनटुनाती हुई घंटियों की सुमधुर ध्वनियाँ मन के तार को झंकृत करतीं ! तब यदा - कदा चरवाहे को चितकबरी भैंस की पीठ पर आसन जमाकर चरवाही करते देख , मैं भी उसके समकक्ष नैसर्गिक   read more

जग में पुस्तक से बड़ा, दोस्त न कोई और
  • Post by Admin on Sep 23 2020

जग में पुस्तक से बड़ा , दोस्त न कोई और /शीर्ष पर पहुँचाए यह , मिले न वरना ठौर । सिमुलतला आवासीय विद्यालय में आनलाइन हिन्दी पखवारांतर्गत  छंद लेखन प्रतियोगिता का परिणाम संयोजक डा. सुधांशु कुमार ने घोषित किया । इसके अंतर्गत प्रथम  स्थान  आराध्या , पलक सुहानी , शांतनू और प्रतीक कुमार ने प्राप्त किया द्वितीय स्थान आकृति , आदित्य और राहुल ने एवं तृतीय स्थान प्रिंस और आदित्य ने प्राप्त   read more