मौलिक शोध को मिलेगी नई दिशा, आरडीएस कॉलेज में ओएनओएस और शोधगंगा की उपयोगिता पर चर्चा

  • Post By Admin on Nov 05 2026
मौलिक शोध को मिलेगी नई दिशा, आरडीएस कॉलेज में ओएनओएस और शोधगंगा की उपयोगिता पर चर्चा

मुजफ्फरपुर : उच्च शिक्षा में शोध की गुणवत्ता, मौलिकता और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रामदयालु सिंह महाविद्यालय (आरडीएस कॉलेज), मुजफ्फरपुर में ऑनलाइन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की सूचना एवं पुस्तकालय नेटवर्क संस्था (INFLIBNET) की डिजिटल सेवाओं वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन (ओएनओएस), शोधगंगा और शोधचक्र के उपयोग तथा उनकी विशेषताओं की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने शिक्षकों और विद्यार्थियों से इन संसाधनों का उपयोग कर शोध कार्यों को अधिक तथ्यपरक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की अपील की।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शशि भूषण कुमार सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता केवल अध्यापन से नहीं, बल्कि शोध, नवाचार और नए ज्ञान के सृजन से भी तय होती है। INFLIBNET की डिजिटल सेवाएं शिक्षकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों को देश-दुनिया के अकादमिक संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों में बेहतर शोध संस्कृति विकसित करने के लिए डिजिटल संसाधनों के प्रति जागरूकता जरूरी है।

गणित विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक त्रिपाठी ने ओएनओएस, शोधगंगा और शोधचक्र की कार्यप्रणाली समझाई। उन्होंने बताया कि वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन के माध्यम से पात्र उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षक, विद्यार्थी और शोधार्थी अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं तथा शैक्षणिक प्रकाशनों तक पहुंच प्राप्त कर सकते हैं। इससे विभिन्न विषयों में हो रहे नवीनतम शोध और अकादमिक गतिविधियों की जानकारी मिलती है। शोधगंगा के बारे में उन्होंने बताया कि यह भारतीय विश्वविद्यालयों के शोध प्रबंधों और लघु शोध प्रबंधों का डिजिटल संग्रह है। इसके माध्यम से शोधार्थी अपने विषय से जुड़े पहले के शोध कार्यों का अध्ययन कर सकते हैं। इससे साहित्य समीक्षा तैयार करने, शोध विषय चुनने और नए शोध की संभावनाएं तलाशने में मदद मिलती है। वहीं, शोधचक्र शोध प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में सहायक मंच है, जिसके जरिए शोध विषय के चयन, साहित्य समीक्षा और शोध प्रस्ताव तैयार करने जैसे कार्यों में सहायता मिलती है।

कार्यक्रम में डॉ. रजनीकांत पांडे और डॉ. सौरव राज ने शोध की पद्धति, मौलिकता और अकादमिक ईमानदारी से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की। डॉ. रजनीकांत पांडे ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए सबसे पहले स्पष्ट शोध समस्या और उपयुक्त विषय का चयन जरूरी है। इसके बाद संबंधित पुस्तकों, शोध पत्रों और पूर्ववर्ती अध्ययनों का गंभीर विश्लेषण करना चाहिए। उन्होंने शोध में प्रमाणिक तथ्यों और सही संदर्भों के इस्तेमाल को अनिवार्य बताया। डॉ. सौरव राज ने कहा कि शोध का उद्देश्य केवल पहले से उपलब्ध जानकारियों को दोहराना नहीं, बल्कि नए तथ्य, विचार और दृष्टिकोण सामने लाना होना चाहिए। शोध की गुणवत्ता उसके आकार से नहीं, बल्कि मौलिकता, प्रमाणिकता और विश्लेषण की गहराई से तय होती है। उन्होंने शोधार्थियों को साहित्यिक चोरी से बचने और प्रत्येक स्रोत का उचित संदर्भ देने की सलाह दी।उन्होंने यह भी कहा कि शोध में डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग सहायक साधन के रूप में किया जा सकता है, लेकिन मौलिक चिंतन, तार्किक क्षमता और शोधार्थी का अपना योगदान सबसे महत्वपूर्ण है।

वक्ताओं ने कहा कि ओएनओएस, शोधगंगा और शोधचक्र जैसी डिजिटल सुविधाओं का प्रभावी इस्तेमाल उच्च शिक्षा में शोध की गुणवत्ता सुधारने और शोध संस्कृति को मजबूत करने में मददगार हो सकता है। इसके लिए शिक्षकों को विद्यार्थियों में अध्ययन, जिज्ञासा, तार्किक चिंतन और शोध के प्रति रुचि विकसित करने की दिशा में पहल करनी चाहिए। कार्यक्रम में डॉ. रमेश प्रसाद गुप्ता, डॉ. आरएन ओझा, डॉ. एमएन रजवी, डॉ. आलोक त्रिपाठी, डॉ. रजनीकांत पांडे, डॉ. भगवान कुमार, डॉ. सौरव राज, डॉ. नीरज कुमार मिश्रा, डॉ. आशुतोष मिश्रा, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. जयदीप घोष, डॉ. श्रुति मिश्रा, डॉ. आरती कुमारी, डॉ. अनुराधा पाठक, डॉ. आनंद प्रकाश दुबे, डॉ. चौधरी संजय कुमार, डॉ. प्रियंका दीक्षित, डॉ. नेयाज अहमद, डॉ. ललित किशोर, डॉ. अंजनी शुक्ला, डॉ. मनीष कुमार शर्मा, डॉ. रविंद्र कुमार, डॉ. आरती मित्रा और डॉ. अमिता त्रिवेदी सहित महाविद्यालय के शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।