पलाश के फूल में छिपे गुणों को शोध ने किया उजागर, प्रो. दिनेश चंद्र राय की टीम को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
- Post By Admin on Nov 05 2026
मुजफ्फरपुर : भारतीय पारंपरिक वनस्पति ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शोध उपलब्धि सामने आई है। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम ने पलाश के फूल से तैयार कोम्बुचा पेय के किण्वन और उसके रासायनिक गुणों का अध्ययन किया है। शोध पत्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘फूड साइंस एंड न्यूट्रिशन’ में प्रकाशित हुआ है।
इस शोध में पलाश यानी ‘बुटिया मोनोस्पर्मा’ के फूलों से तैयार कोम्बुचा को पारंपरिक चाय आधारित कोम्बुचा के पौध-आधारित विकल्प के रूप में परखा गया। शोधकर्ताओं ने 14 दिनों तक इसकी किण्वन प्रक्रिया का अध्ययन किया। इसके लिए न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) स्पेक्ट्रोस्कोपी और जीवित कोशिका चित्रण जैसी आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। अध्ययन के दौरान शोध दल ने बैक्टीरिया और यीस्ट की सहजीवी संस्कृति, जिसे स्कोबी (SCOBY) कहा जाता है, की संरचना और विकास का विश्लेषण किया। चित्रों के विश्लेषण में सतह पर सूक्ष्मजीवों के फैलाव, कणों की संख्या और उनके समूहों के आकार में वृद्धि दर्ज की गई। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह परिणाम किण्वन के दौरान सूक्ष्मजीवों के मजबूत और परस्पर जुड़े तंत्र के विकास को दर्शाता है। शोध के रासायनिक विश्लेषण में भी महत्वपूर्ण बदलाव सामने आए। पलाश फूल से तैयार पेय की डीपीपीएच रेडिकल-स्कैवेंजिंग एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि किण्वन के दौरान 60.93 प्रतिशत से बढ़कर 80.41 प्रतिशत हो गई। इसके साथ ही कुल फेनोलिक और फ्लेवोनॉइड तत्वों की मात्रा में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। ये तत्व पौधों में पाए जाने वाले जैव सक्रिय यौगिकों से संबंधित हैं।
यह अध्ययन भारत और ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं के सहयोग से पूरा किया गया। शोध दल में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान के डेयरी विज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग से सुमन भारती, अरविंद कुमार और दीपेंद्र कुमार महतो शामिल रहे। प्रो. दिनेश चंद्र राय ने भी शोध में योगदान दिया। इसके अलावा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी के आनंद कुमार पांडेय तथा ऑस्ट्रेलिया के डीकिन विश्वविद्यालय स्थित सीएएसएस फूड रिसर्च सेंटर और हाइफनेटेड एनालिटिकल सेपरेशन टेक्नोलॉजीज (हाईटेक) से यदा नोलवाचाई ने भी अध्ययन में भागीदारी की।
शोध की उपलब्धि पर प्रसन्नता जताते हुए कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय ने कहा कि किण्वन प्रक्रिया से इस पेय के कार्यात्मक गुणों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उनका उद्देश्य ऐसे पौध-आधारित खाद्य और पेय विकल्पों को बढ़ावा देना है, जो स्वास्थ्य के अनुकूल हों और दुनिया भर में बढ़ती मांग के अनुरूप नए विकल्प उपलब्ध करा सकें। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के शोध से खाद्य उद्योग के साथ सहयोग, खाद्य प्रणालियों की मजबूती और चयापचय संबंधी अनुसंधान को भी आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। प्रो. राय ने कहा कि यह शोध भारतीय पारंपरिक वनस्पतियों पर हो रहे वैज्ञानिक कार्यों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। आधुनिक चित्रण और मेटाबोलॉमिक तकनीकों के माध्यम से स्वदेशी वनस्पति संसाधनों की उपयोगिता को नए सिरे से समझने का अवसर मिल रहा है। शोध पत्र का प्रकाशन फूड साइंस एंड न्यूट्रिशन में हुआ है। दी गई जानकारी के अनुसार, इस शोध पत्रिका का इंपैक्ट फैक्टर 5.0 है और खाद्य विज्ञान के क्षेत्र में इसे एससीआईमैगो की क्यू1 श्रेणी में स्थान प्राप्त है।