यदि आपके गाड़ी का इंश्योरेंस फेल है तो आपके लिए भी बुरी खबर है, जानें सुप्रीम कोर्ट के आदेश
- Post By Admin on Aug 05 2026
नई दिल्ली: देशभर में बिना वैध बीमा (इंश्योरेंस) के सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ितों को समय पर मुआवजा सुनिश्चित करने और मोटर वाहन कानून का प्रभावी पालन कराने के उद्देश्य से अदालत ने केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों को सख्त कदम उठाने के सुझाव दिए हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यहां तक कहा कि जिन वाहनों का वैध बीमा नहीं है, उन्हें पेट्रोल और डीजल उपलब्ध कराने पर रोक लगाने जैसे विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत प्रत्येक वाहन के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में वाहन बिना वैध बीमा के सड़कों पर संचालित हो रहे हैं। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में यदि कोई सड़क दुर्घटना होती है तो पीड़ितों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया जटिल हो जाती है, जिससे न्याय मिलने में अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए सख्त निगरानी और प्रवर्तन आवश्यक है। सुनवाई के दौरान अदालत ने हाईवे और प्रमुख मार्गों पर लगाए गए कैमरों के अधिक प्रभावी उपयोग पर भी जोर दिया। कोर्ट ने सुझाव दिया कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए कैमरों की मदद से बिना वैध बीमा वाले वाहनों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ स्वतः ई-चालान जारी किए जाएं। अदालत का मानना है कि इससे नियमों का उल्लंघन करने वालों पर त्वरित कार्रवाई संभव होगी और कानून के पालन को मजबूती मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी दोहराया कि नई कार खरीदने पर चार वर्ष तथा नई दोपहिया वाहन खरीदने पर छह वर्ष का थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य होता है। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद वाहन मालिकों की जिम्मेदारी है कि वे समय-समय पर अपने बीमा का नवीनीकरण कराते रहें। अदालत ने कहा कि बीमा केवल कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को आर्थिक सुरक्षा और समय पर मुआवजा दिलाने का महत्वपूर्ण आधार है। अदालत ने केंद्र और संबंधित एजेंसियों से डिजिटल निगरानी, आधुनिक तकनीक और प्रभावी प्रवर्तन तंत्र विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि यदि इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो सड़क सुरक्षा मजबूत होगी, यातायात नियमों के पालन में सुधार आएगा और दुर्घटना पीड़ितों को समय पर न्याय एवं मुआवजा मिलने का मार्ग और अधिक सुदृढ़ होगा।