पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस और पितृपक्ष के अवसर पर पर्यावरण भारती ने लगाए 15 पौधे

  • Post By Admin on Sep 26 2026
पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस और पितृपक्ष के अवसर पर पर्यावरण भारती ने लगाए 15 पौधे

लखीसराय : विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस एवं पूर्णिमा श्राद्ध के अवसर पर पर्यावरण भारती की ओर से वृन्दावन, कियूल, चानन, लखीसराय में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान फलदार एवं पुष्पदार पौधों सहित कुल 15 पौधे लगाए गए। पौधारोपण का नेतृत्व शिक्षक अरविंद कुमार ने किया, जबकि हिमालय ने कार्यक्रम में सहयोग किया। कार्यक्रम के दौरान आंवला, जामुन और कदंब के पांच पौधे, पारिजात एवं गुलहड़ (अरहुल) के चार पौधे तथा सेमल के छह पौधे लगाए गए। पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने पौधों के संरक्षण और उनकी नियमित देखभाल का संकल्प भी लिया।

पर्यावरण भारती के संस्थापक, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के प्रांत संयोजक एवं अखिल भारतीय पेड़ उपक्रम टोली के सदस्य राम बिलास शाण्डिल्य ने कहा कि विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस का उद्देश्य पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध के प्रति लोगों को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, आपदा से निपटने में सक्षम समुदायों का निर्माण तथा वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने लोगों से पर्यावरण को स्वच्छ, संतुलित और प्रदूषणमुक्त बनाए रखने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनकी देखभाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बंजर भूमि में तालाब निर्माण, जल संरक्षण, प्रदूषण में कमी और पॉलिथीन के उपयोग को कम करने जैसे प्रयास पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

राम बिलास शाण्डिल्य ने कहा कि भावी पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण और पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक परिवार को कम से कम 10 पौधे लगाने और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने जल को जीवन का आधार बताते हुए लोगों से पानी बचाने का भी आह्वान किया। पितृपक्ष के संदर्भ में उन्होंने कहा कि पूर्णिमा श्राद्ध के साथ पितृपक्ष की शुरुआत मानी जाती है। इस अवधि में लोग अपने पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं और तर्पण एवं पिंडदान जैसी परंपराओं का पालन करते हैं। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष में सात्विक भाव के साथ पूर्वजों का स्मरण करने की परंपरा रही है। उन्होंने पूर्वजों की स्मृति में पौधारोपण को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए लोगों को वृक्ष लगाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और भारतीय परंपराओं के बीच प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना जुड़ी हुई है। पेड़-पौधे लगाने और उनकी रक्षा करने से प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है।

पौधारोपण कार्यक्रम में शिक्षक अरविंद कुमार, हिमालय, नीलम देवी, योगेन्द्र साह, अभिषेक कुमार, राकेश कुमार, विशाल, राम बिलास शाण्डिल्य, हरि मांझी, संजीव कुमार, अक्षत राज सहित अन्य लोगों ने भाग लिया।