एनीमिया के गंभीर मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क, लखीसराय में एएनएम-जीएनएम की कार्यशाला

  • Post By Admin on Oct 06 2026
एनीमिया के गंभीर मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क, लखीसराय में एएनएम-जीएनएम की कार्यशाला

लखीसराय : जिले में एनीमिया की समस्या से निपटने और गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मंगलवार को सदर अस्पताल, लखीसराय के सभागार में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। स्वास्थ्य विभाग और पिरामल फाउंडेशन के संयुक्त आयोजन में हुई इस कार्यशाला की अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह ने की। प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न प्रखंडों से पहुंचीं एएनएम और जीएनएम को एनीमिया की पहचान, उपचार और मरीजों की निगरानी से जुड़ी जानकारी दी गई।

सिविल सर्जन ने प्रशिक्षण के दौरान कहा कि क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं के बीच एनीमिया की पहचान समय रहते करना जरूरी है। विशेष रूप से अल्प या गंभीर एनीमिया से प्रभावित गर्भवती महिलाओं को चिकित्सकीय मानकों के अनुसार फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (एफसीएम) देने की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया। उन्होंने बताया कि जरूरत के अनुसार एफसीएम का इस्तेमाल हीमोग्लोबिन स्तर में अपेक्षाकृत तेजी से सुधार लाने में मदद कर सकता है और प्रसव के दौरान संभावित जटिलताओं के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है।उन्होंने कहा कि लखीसराय को एनीमिया से मुक्त करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग प्राथमिकता के साथ काम कर रहा है। प्रशिक्षण के दौरान दी गई जानकारी को स्वास्थ्य केंद्रों और समुदाय स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने तथा निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप कार्य करने की आवश्यकता पर भी उन्होंने बल दिया।

जिला सामुदायिक उत्प्रेरक आशुतोष सिंह ने बताया कि कुछ परिस्थितियों में जब आयरन की सामान्य दवाओं से अपेक्षित सुधार नहीं हो पाता है, तब चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एफसीएम को नस के माध्यम से दिया जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से गंभीर एनीमिया के मामलों में समय पर पहचान, चिकित्सकीय मूल्यांकन और उचित स्वास्थ्य केंद्र तक रेफर करने की आवश्यकता बताई। उनका कहना था कि समय पर उपचार मिलने से गर्भवती महिला और उसके होने वाले बच्चे से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।

प्रशिक्षण के दौरान एएनएम और जीएनएम को निर्देश दिया गया कि आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्व जांच और गृह भ्रमण के दौरान एनीमिया के संभावित मामलों की पहचान कराई जाए। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल भेजने तथा चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार सुनिश्चित कराने पर जोर दिया गया। उपचार के बाद नियमित निगरानी और फॉलो-अप की प्रक्रिया के बारे में भी प्रशिक्षुओं को जानकारी दी गई।

कार्यशाला में पिरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि कुंदन कुमार ने एनीमिया प्रबंधन से जुड़े आंकड़ों के संधारण और निगरानी व्यवस्था पर तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने डिजिटल माध्यम से आंकड़ों की प्रविष्टि, रिपोर्ट तैयार करने और मरीजों के उपचार के बाद फॉलो-अप की निगरानी से जुड़ी प्रक्रिया को समझाया। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर सही आंकड़ों का संकलन और समय पर फॉलो-अप एनीमिया नियंत्रण से जुड़े कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।