शास्त्रार्थ से आधुनिक शोध तक: आरडीएस कॉलेज में गूंजा भारतीय ज्ञान परंपरा का समृद्ध इतिहास

  • Post By Admin on Oct 06 2026
शास्त्रार्थ से आधुनिक शोध तक: आरडीएस कॉलेज में गूंजा भारतीय ज्ञान परंपरा का समृद्ध इतिहास

मुजफ्फरपुर : रामदयालु सिंह महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग, गणित विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को "भारतीय ज्ञान परंपरा: अतीत से वर्तमान तक" विषय पर एक दिवसीय विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। कॉलेज के कृष्ण सभा भवन में आयोजित इस संगोष्ठी में विषय विशेषज्ञों, प्राध्यापकों और छात्र-छात्राओं ने गहन विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं आईआईटी पटना के भारतीय ज्ञान परंपरा सेल के रिसोर्स पर्सन रूपेश कुमार चतुर्वेदी ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा वस्तुतः प्रश्न, तर्क और संवाद की एक जीवंत परंपरा है। उन्होंने रेखांकित किया कि यह परंपरा जिज्ञासा, तार्किकता और स्वतंत्र चिंतन को सदैव प्रोत्साहित करती आई है। उपनिषदों से लेकर शास्त्रार्थ की समृद्ध विधा तक, संवाद के माध्यम से सत्य का अन्वेषण ही इसकी सबसे बड़ी ताकत रही है। सर विलियम जोन्स, मैक्स मूलर, कोलब्रुक और मेगास्थनीज जैसे पाश्चात्य विद्वानों के अध्ययनों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल आध्यात्मिक विरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि भाषा, गणित, दर्शन और विज्ञान की परिपक्व बौद्धिक प्रणाली है। उन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता के नगर नियोजन, जल प्रबंधन और स्थापत्य कौशल को तत्कालीन उन्नत वैज्ञानिक समझ का स्पष्ट प्रमाण बताया।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शशि भूषण कुमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकृति, समाज और समस्त जीवों के प्रति सह-अस्तित्व और संवेदनशीलता की भावना विकसित करती है। इसमें आहार और परिधान को भी संस्कृति व जीवन पद्धति का अभिन्न अंग माना गया है, जिसमें सात्विक जीवनशैली मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों व शिक्षकों दोनों को इस समृद्ध परंपरा से जुड़ने का आह्वान किया। वहीं डॉ. रमेश प्रसाद गुप्ता ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परंपरा व्यक्ति को अनुशासन, कर्तव्य, नैतिकता और लोक कल्याण की भावना से ओतप्रोत करती है।

व्याख्यान के उपरांत संवाद सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें प्राध्यापक डॉ. अनुराधा पाठक और डॉ. नीरज कुमार मिश्रा के अलावा छात्रा पुतुल कुमारी, प्रीति कुमारी एवं अन्नु कुमारी ने मुख्य वक्ता से ज्ञान परंपरा के समकालीन अनुप्रयोगों से जुड़े सवाल किए। कार्यक्रम में विषय प्रवेश डॉ. रजनीकांत पांडे ने कराया, मंच संचालन डॉ. नीरज कुमार मिश्रा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आलोक त्रिपाठी द्वारा प्रस्तुत किया गया।

इस अवसर पर डॉ. एम. एन. रजवी, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. आरती कुमारी, डॉ. स्नेह लता, डॉ. आयशा जमाल, डॉ. प्रियंका दीक्षित, डॉ. श्रुति मिश्रा, डॉ. सौरभ राज, डॉ. भगवान कुमार, डॉ. ललित किशोर, डॉ. पंकज तिवारी, डॉ. विकास कुमार, डॉ. सी. के. झा, डॉ. अमर ज्योति रंजन, डॉ. चौधरी संजय कुमार, डॉ. नेयाज अहमद, डॉ. बिंदु सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।