वैकल्पिक प्रोटीन के नए विकल्पों पर शोध प्रकाशित, प्रो. दिनेश चंद्र राय की टीम ने हासिल की उपलब्धि
- Post By Admin on Sep 28 2026
मुजफ्फरपुर : भविष्य की खाद्य जरूरतों और टिकाऊ पोषण व्यवस्था को लेकर किए जा रहे शोध के क्षेत्र में बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय के नेतृत्व में शोध टीम ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। टीम द्वारा वैकल्पिक प्रोटीन स्रोतों पर तैयार की गई विस्तृत समीक्षा प्रतिष्ठित *जर्नल ऑफ फूड बायोकेमिस्ट्री* में प्रकाशित हुई है। इस शोध में बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच पारंपरिक प्रोटीन के विकल्पों की संभावनाओं और उनसे जुड़ी चुनौतियों का अध्ययन किया गया है।
“एक्सप्लोरिंग अल्टरनेटिव प्रोटीन सोर्सेज टुवॉर्ड सस्टेनेबल एंड फ्यूचर न्यूट्रिशन” शीर्षक से प्रकाशित इस लेख में भविष्य की पोषण जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न वैकल्पिक प्रोटीन स्रोतों की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की गई है। यह शोध भारत और ऑस्ट्रेलिया के कई प्रमुख शिक्षण एवं शोध संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयास का परिणाम है। यह लेख जर्नल के विशेष संग्रह “वुमन इन फूड साइंस स्पेशल कलेक्शन सी एडवांसिंग प्रोटीन बेस्ड फूड्स: नॉवेल सोर्सेज, एन्हांस्ड फंक्शनैलिटी एंड सस्टेनेबल सॉल्यूशंस” में प्रकाशित किया गया है। शोध दल में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान स्थित डेयरी साइंस एंड फूड टेक्नोलॉजी विभाग की उर्वशी विक्रांता, अंकिता हुड्डा और अभिषेक दत्त त्रिपाठी शामिल हैं।
इसके अलावा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी एवं बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर से प्रो. दिनेश चंद्र राय, ऑस्ट्रेलिया के डिकिन विश्वविद्यालय, बर्वुड स्थित सीएएसएस फूड रिसर्च सेंटर, स्कूल ऑफ एक्सरसाइज एंड न्यूट्रिशन साइंस से दीपेंद्र कुमार महतो, लखनऊ विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग से प्रदीप कुमार तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी इरविन कॉलेज से अपर्णा अग्रवाल ने शोध में योगदान दिया है। शोध में बताया गया है कि दुनिया की बढ़ती आबादी के साथ पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण प्रोटीन की मांग भी बढ़ रही है। वहीं जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव और खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियों के कारण भविष्य के लिए नए एवं टिकाऊ प्रोटीन स्रोत विकसित करने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसी संदर्भ में शोध टीम ने पारंपरिक पशु-आधारित प्रोटीन के विकल्प के रूप में विभिन्न नए स्रोतों का विश्लेषण किया है।
प्रो. दिनेश चंद्र राय के अनुसार, समीक्षा में पौध-आधारित प्रोटीन के साथ कोशिका-आधारित, संवर्धित तथा कीट-आधारित प्रोटीन स्रोतों को भी शामिल किया गया है। इन विकल्पों की पोषण क्षमता, भविष्य में उपयोग की संभावनाओं और खाद्य व्यवस्था में उनकी भूमिका पर शोध में विस्तार से विचार किया गया है। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक प्रोटीन स्रोत ऐसे क्षेत्रों में पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मददगार हो सकते हैं, जहां पारंपरिक प्रोटीन स्रोतों की उपलब्धता सीमित है। हालांकि, इनके व्यापक इस्तेमाल के लिए उत्पादन प्रक्रिया को विश्वसनीय और सुरक्षित बनाना जरूरी होगा। इसके साथ ही नियामक संस्थाओं की प्रभावी भूमिका और पारदर्शी विनिर्माण मानकों की भी आवश्यकता होगी।
प्रो. राय ने उपभोक्ताओं के बीच भरोसा कायम करने को भी महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि लोगों को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि नए प्रोटीन स्रोत सुरक्षा और पोषण की दृष्टि से किस स्तर पर खरे उतरते हैं और उन्हें नियमित आहार में किस प्रकार शामिल किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे खाद्य विकल्पों को विकसित करने पर जोर होना चाहिए, जो मानव स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ खाद्य व्यवस्था को भी लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने में योगदान दें। उनके अनुसार, इस तरह के शोध से वैज्ञानिक अनुसंधान के नए क्षेत्रों को बढ़ावा मिलने के साथ खाद्य उद्योग और नीति निर्माण के क्षेत्र में भी संभावनाएं विकसित हो सकती हैं।
शोध टीम की इस उपलब्धि पर दोनों विश्वविद्यालयों से जुड़े शिक्षकों, शोधार्थियों और पूर्व छात्रों ने प्रो. दिनेश चंद्र राय सहित पूरी टीम को बधाई दी है। शोध प्रकाशन को वैकल्पिक प्रोटीन और भविष्य की टिकाऊ पोषण व्यवस्था के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अकादमिक योगदान माना जा रहा है।