पितृ स्मरण और विश्व रेबीज दिवस पर पर्यावरण भारती ने लगाए पीपल के पौधे

  • Post By Admin on Sep 28 2026
पितृ स्मरण और विश्व रेबीज दिवस पर पर्यावरण भारती ने लगाए पीपल के पौधे

मुजफ्फरपुर : पर्यावरण संरक्षण और पूर्वजों के पुण्य स्मरण का संदेश देते हुए पर्यावरण भारती की ओर से स्वर्गीय भागवत शाण्डिल्य के पुण्य स्मरण तथा विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर देव वृक्ष पीपल के तीन पौधे लगाए गए। पौधारोपण कार्यक्रम का नेतृत्व पर्यावरण प्रहरी हिमालय ने किया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण के महत्व के साथ पितृपक्ष के दौरान प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया गया।

पर्यावरण भारती के संस्थापक राम बिलास शाण्डिल्य ने अपने पिता स्वर्गीय भागवत शाण्डिल्य और माता स्वर्गीय सुशीला देवी का स्मरण करते हुए कहा कि पितृपक्ष अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करने का अवसर है। उन्होंने बताया कि उनके तीन भाई कैलाश, राम बिलास और जय प्रकाश हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति भी संवेदनशीलता दिखाई जाती है।

राम बिलास शाण्डिल्य ने कहा कि गया में फल्गु नदी में पितरों को तर्पण और पिंडदान करने के साथ देव वृक्ष पीपल में जल अर्पित करने की परंपरा है। इस दौरान कौवा समेत पक्षियों, गाय और कुत्तों को भोजन कराने की परंपरा भी रही है। उनके अनुसार पितृपक्ष को केवल पूर्वजों के स्मरण तक सीमित न रखते हुए प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण से भी जोड़कर देखा जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि पीपल को भारतीय परंपरा में देव वृक्ष का दर्जा दिया गया है और पर्यावरण की दृष्टि से भी इसका महत्व है। उन्होंने बताया कि पीपल के नए पौधों के प्रसार में पक्षियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसी कारण प्रकृति के संतुलन में पक्षियों और अन्य जीवों का भी योगदान है। उन्होंने लोगों से अपील की कि पितृपक्ष में अपने पूर्वजों के पुण्य स्मरण में कम से कम एक पीपल का पौधा अवश्य लगाएं और उसकी कम से कम पांच वर्षों तक देखभाल करें। उनके अनुसार पौधारोपण के साथ पौधों की सुरक्षा और संरक्षण भी पर्यावरण संतुलन के लिए जरूरी है।

विश्व रेबीज दिवस के संदर्भ में राम बिलास शाण्डिल्य ने कहा कि यह दिवस प्रत्येक वर्ष 28 सितंबर को मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य लोगों को रेबीज से बचाव के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने रेबीज के टीके के विकास में वैज्ञानिक लुई पाश्चर के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि 28 सितंबर 1895 को फ्रांस में उनका निधन हुआ था। उनके योगदान को स्मरण करते हुए इस दिन विश्व रेबीज दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि कुत्तों के काटने से होने वाले रेबीज के प्रति जागरूकता और समय पर बचाव के उपायों की जानकारी लोगों तक पहुंचाना जरूरी है। विश्व रेबीज दिवस जैसे अवसर पर पौधारोपण को पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता से जोड़ना कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान करता है।

पौधारोपण कार्यक्रम में शशांक कुमार, आमोद कुमार, पिंटू, हिमालय, राम बिलास शाण्डिल्य, कृष्ण कुमार, दिलीप, शैलेन्द्र, सत्येंद्र कुमार, धनंजय, रणजीत सहित अन्य लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, पौधों की देखभाल और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।