मुजफ्फरपुर की लीची और लोक संस्कृति को दिल्ली के गांधी आश्रम में मिला सांस्कृतिक मंच

  • Post By Admin on Sep 28 2026
मुजफ्फरपुर की लीची और लोक संस्कृति को दिल्ली के गांधी आश्रम में मिला सांस्कृतिक मंच

मुजफ्फरपुर : सरला श्रीवास सोशल कल्चरल रिसर्च फाउंडेशन की बैठक सोमवार को मालीघाट, मुजफ्फरपुर में संस्थान की संरक्षक एवं वरिष्ठ कठपुतली कलाकार कांता देवी की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में फाउंडेशन के सचिव एवं कठपुतली कलाकार सुनील कुमार ने दिल्ली के किंग्सवे कैंप स्थित गांधी आश्रम में आयोजित दो दिवसीय ‘सद्भावना सम्मेलन’ में ‘लीचिया लाले लाल’ की प्रस्तुति और पुस्तक भेंट किए जाने की जानकारी दी।

सुनील कुमार ने बताया कि महात्मा गांधी द्वारा वर्ष 1932 में स्थापित हरिजन सेवक संघ स्थापना काल से ही सामाजिक समानता, सांप्रदायिक सद्भाव, अस्पृश्यता-निवारण, शिक्षा, ग्रामीण विकास, स्वावलंबन, मानवीय गरिमा और शांति जैसे विषयों पर कार्य करता रहा है। हरिजन सेवक संघ के 94वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का केंद्रीय विषय ‘राष्ट्र के लिए युवा’ रखा गया था। सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवा, विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी एवं शोधार्थी, गांधीवादी चिंतक, विद्वान, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अलग-अलग सत्रों में राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका, गांधीवादी मूल्यों की प्रासंगिकता और प्रेरणादायी व्यक्तित्वों के योगदान पर विचार-विमर्श किया गया।

सुनील कुमार ने बताया कि 24 सितंबर 1932 को महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर के बीच ऐतिहासिक पूना पैक्ट हुआ था। इसी ऐतिहासिक दिवस के अवसर पर हरिजन सेवक संघ का 94वां स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया। दिल्ली के गांधी आश्रम, किंग्सवे कैंप में आयोजित समारोह की अध्यक्षता हरिजन सेवक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डॉ. शंकर कुमार सान्याल ने की। समारोह का शुभारंभ दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू द्वारा किया गया। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य गांधीजी के विचारों, सामाजिक समरसता, सेवा, सद्भाव और युवाओं की रचनात्मक भागीदारी के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाना था।

इस अवसर पर सरला श्रीवास सोशल कल्चरल रिसर्च फाउंडेशन की ओर से हरिजन सेवक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डॉ. शंकर कुमार सान्याल, उपाध्यक्ष नरेश यादव तथा अखिल भारतीय पंचायत परिषद के अध्यक्ष वाल्मीकि प्रसाद सिंह को मुजफ्फरपुर की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी पुस्तक ‘लीचिया लाले लाल’ भेंट की गई। कार्यक्रम में बिहार के विकास पथ विक्रम, पटना के संस्थापक सचिव सतेंद्र कुमार शांडिल्य और जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र, समस्तीपुर के सचिव सुरेंद्र कुमार सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

‘लीचिया लाले लाल’ के माध्यम से मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध लीची, स्थानीय लोक संस्कृति और लोकगीतों को व्यापक पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। फाउंडेशन के अनुसार, यह पहल स्थानीय लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। सुनील कुमार ने कहा कि लोकगीत और लोक कलाएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे समाज की स्मृतियों, परंपराओं, प्रकृति और स्थानीय जीवनशैली को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय संस्कृति और लोक परंपराओं से जुड़े ऐसे प्रयासों को लगातार आगे बढ़ाने की जरूरत है।