‘मानस के प्रसंग और पात्र’ में समकालीन संदर्भों में मानस चिंतन को दी गई नई दृष्टि

  • Post By Admin on Oct 04 2026
‘मानस के प्रसंग और पात्र’ में समकालीन संदर्भों में मानस चिंतन को दी गई नई दृष्टि

मुजफ्फरपुर: आमगोला स्थित शुभानंदी परिसर के प्रतिभा सभागार में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अवकाशप्राप्त राजभाषा अधिकारी विमल कुमार परिमल की पुस्तक ‘मानस के प्रसंग और पात्र’ का लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता विनोद कुमार सिन्हा ने की। इस दौरान साहित्यकारों और विद्वानों ने पुस्तक की विषयवस्तु, उपयोगिता और वर्तमान सामाजिक परिवेश में इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की।

विषय प्रवर्तन करते हुए डॉ. संजय पंकज ने कहा कि विमल कुमार परिमल की यह कृति मानस चिंतन के व्यापक और शाश्वत सार तत्व को समकालीन संदर्भों में निरूपित करती है। भारतीय संस्कृति मानवीय मूल्यों की आचार संहिता है और रामचरितमानस के सभी पात्र जीवन जीने की कला का संदेश देते हैं। लेखक ने मानस के प्रेरक प्रसंगों को गंभीरता से उजागर करते हुए उन्हें चरित्र निर्माण की दृष्टि से प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में शामिल आलेख परिवार, समाज और मनुष्य के जीवन के लिए प्रेरणादायक और उद्बोधक हैं। मुख्य वक्ता डॉ. पूनम सिन्हा ने कहा कि विमल कुमार परिमल ने रामचरितमानस के प्रसंगों का बारीकी से विश्लेषण किया है। यह पुस्तक पाठकों को जीवन जीने के सूत्र प्रदान करती है और मानस के विभिन्न प्रसंगों को समझने की नई दृष्टि देती है।

डॉ. त्रिविक्रम नारायण सिंह ने कहा कि मानस से जुड़े प्रसंगों को लेखक ने विवेकपूर्ण विमर्श का स्वरूप प्रदान किया है। वहीं उदयनारायण सिंह ने मानस की महिमा के समाजीकरण के प्रयास के लिए विमल कुमार परिमल को साधुवाद दिया। उन्होंने पुस्तक को प्रेरक, अनुकरणीय और ज्ञानवर्धक बताया। डॉ. रणवीर राजन ने कहा कि मानस चिंतन के दौरान विमल कुमार परिमल ने संवेदनात्मक दृष्टिकोण से विषय को प्रस्तुत किया है। विनोद कुमार सिन्हा, एच.एल. गुप्ता, श्रीमन्नारायण और डॉ. अनु शांडिल्य ने भी पुस्तक की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान सामाजिक परिवेश में इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया।

अपने संबोधन में पुस्तक के लेखक विमल कुमार परिमल ने कहा कि उनके रचनात्मक विकास में परिवार, समाज और परिवेश का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस उनके लिए आदर्श रहा है और इसी से जुड़े जीवन-मूल्यों एवं प्रसंगों को व्यापक संदर्भ में प्रस्तुत करने का प्रयास उन्होंने इस पुस्तक के माध्यम से किया है। समारोह में ब्रजभूषण शर्मा, राकेश कुमार सिंह, प्रेमभूषण, अनिल मिश्रा, विभु कुमारी, चैतन्य चेतन, प्रमोद आजाद और अमरेंद्र कुमार सहित कई साहित्यप्रेमी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में डॉ. केशव किशोर कनक ने धन्यवाद ज्ञापन किया।