ड्यूक हॉस्टल का ताला खोलने समेत 10 मांगों पर अड़े छात्र, बिगड़ती तबीयत के बीच आंदोलन तेज
- Post By Admin on Oct 03 2026
मुजफ्फरपुर: बीआरए बिहार विश्वविद्यालय और लंगट सिंह महाविद्यालय में 10 सूत्रीय मांगों को लेकर जारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुक्रवार को चौथे दिन और अधिक तीखे दौर में पहुंच गई। अनशनकारी छात्रों की लगातार बिगड़ती तबीयत और मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने से आंदोलनकारी छात्रों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया। छात्रों ने पहले लंगट सिंह महाविद्यालय में प्राचार्य का पुतला दहन किया और इसके बाद विश्वविद्यालय मुख्यालय पहुंचकर कुलपति आवास के सामने कुलपति का पुतला फूंककर विरोध जताया।
पिछले 96 घंटे से अनशन पर बैठे छात्रों की स्थिति लगातार कमजोर बताई जा रही है। स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों की टीम धरना स्थल पर पहुंचकर समय-समय पर अनशनकारियों की जांच कर रही है और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध करा रही है। आंदोलनकारी छात्रों का आरोप है कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद कुलपति और महाविद्यालय प्राचार्य ने स्वयं धरना स्थल पर पहुंचकर अनशनकारियों से बातचीत नहीं की है।
छात्रों के बढ़ते आक्रोश के बीच विश्वविद्यालय की ओर से चीफ प्रॉक्टर, छात्र कल्याण अध्यक्ष (डीएसडब्ल्यू) और इंस्पेक्टर ऑफ कॉलेजेस (आर्ट्स) धरना स्थल पर पहुंचे। छात्रों का आरोप है कि अधिकारियों के साथ हुई बातचीत में उनकी मूल मांगों पर ठोस निर्णय के बजाय आश्वासन और बातचीत तक ही मामला सीमित रहा। इससे आंदोलनकारी छात्रों में नाराजगी और बढ़ गई। धरना स्थल पर छात्रों ने स्पष्ट किया कि ड्यूक हॉस्टल का ताला खुलने, छात्रावास आवंटन, एससी-एसटी छात्रों एवं छात्राओं से लिए गए नामांकन शुल्क की वापसी तथा लाइब्रेरी, लैब, स्वच्छता और खेल सुविधाओं से जुड़ी मांगों पर ठोस प्रशासनिक आदेश जारी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित और प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे भूख हड़ताल समाप्त नहीं करेंगे।
आंदोलनकारी छात्रों ने यह भी कहा कि अनशनकारियों की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। ऐसी स्थिति में यदि किसी छात्र के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचता है तो उसकी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन और महाविद्यालय प्रशासन की होगी। धरना स्थल पर तान्या कुमारी, गौरी कुमारी, श्रुति कुमारी, केसर कुमारी, नैना कुमारी, संध्या कुमारी, राहुल कुमार, राज, अमन कुमार, हिमांशु, सुजीत, आशुतोष, अनमोल, अमीत, प्रभात, नितीश कुमार, लोकेश, शिवम, नितीन, श्याम, सोनू कुमार, अंकुश, अभिषेक राज, अमित और सौरभ समेत सैकड़ों छात्र-कार्यकर्ता मौजूद रहे।
आंदोलन को समर्थन देने के लिए कई सामाजिक और राजनीतिक लोग भी धरना स्थल पर पहुंचे और छात्रों से उनकी मांगों की जानकारी ली। भूमिहार नेता अमर बाबू ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर छात्रों की समस्याएं सुनीं और उनकी मांगों को लेकर उचित स्तर पर प्रयास करने की बात कही। आंदोलन के चौथे दिन छात्रों की संख्या बढ़ने और पुतला दहन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन पर अब आंदोलनकारियों की मांगों के समाधान को लेकर दबाव बढ़ गया है। हालांकि, देर शाम तक छात्रों की ओर से भूख हड़ताल समाप्त करने की घोषणा नहीं की गई थी।