भूख हड़ताल के 5वें दिन भी नहीं पहुंचे कुलपति और प्राचार्य, अनशनकारियों की हालत नाजुक

  • Post By Admin on Oct 04 2026
भूख हड़ताल के 5वें दिन भी नहीं पहुंचे कुलपति और प्राचार्य, अनशनकारियों की हालत नाजुक

मुजफ्फरपुर: लंगट सिंह महाविद्यालय और बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में 10 सूत्रीय मांगों को लेकर जारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल रविवार को पांचवें दिन भी जारी रही। 100 घंटे से अधिक समय से अन्न-जल त्यागकर अनशन पर बैठे छात्रों की स्वास्थ्य स्थिति लगातार बिगड़ने का दावा आंदोलनकारियों की ओर से किया गया है। छात्रों का आरोप है कि गंभीर स्थिति के बावजूद विश्वविद्यालय और महाविद्यालय प्रशासन की ओर से अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई जा रही है।

रविवार का दिन बीत जाने के बावजूद कुलपति और महाविद्यालय के प्राचार्य के धरना स्थल पर नहीं पहुंचने को लेकर आंदोलनकारी छात्रों में नाराजगी देखी गई। छात्रों ने आरोप लगाया कि लगातार अनशन के बावजूद प्रशासन की ओर से उनकी मांगों के समाधान के लिए ठोस पहल नहीं की गई है। इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सावन पांडे धरना स्थल पर पहुंचे और अनशनकारी छात्रों से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने छात्रों की मांगों को जायज बताते हुए आंदोलन को अपना समर्थन दिया और प्रशासन की ओर से समाधान की पहल नहीं किए जाने पर चिंता जताई।

आंदोलन को उस समय और समर्थन मिला, जब लंगट सिंह महाविद्यालय के कई पूर्व छात्र भी धरना स्थल पर पहुंचे। पूर्व छात्रों ने अनशनकारियों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया और उनके साथ धरने में शामिल हुए। पूर्व छात्रों ने कहा कि कॉलेज और विश्वविद्यालय की गरिमा तथा छात्र हितों की रक्षा के लिए वे आंदोलनकारी छात्रों के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों की मांगों का समाधान नहीं किया गया तो पूर्व छात्र समाज के अन्य लोगों के साथ मिलकर आंदोलन को और व्यापक करने पर विचार करेंगे। रविवार की छुट्टी के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं धरना स्थल पर पहुंचे। इस दौरान छात्रों ने नारेबाजी कर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। शाम के समय लंगट सिंह महाविद्यालय परिसर में बाबू लंगट सिंह की प्रतिमा के सामने छात्रों ने कैंडल मार्च निकाला। मोमबत्तियां जलाकर आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया।

भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने कहा कि प्रशासनिक उपेक्षा से उनका संकल्प कमजोर नहीं होगा। आंदोलनकारियों ने दोहराया कि छात्रावास खोलने, कथित अवैध नामांकन शुल्क की वापसी और कॉलेज की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी मांगों पर ठोस आधिकारिक आदेश जारी होने तक भूख हड़ताल जारी रहेगी। आंदोलनकारी छात्रों ने यह भी चेतावनी दी कि लंबे समय से अनशन पर बैठे छात्रों की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। यदि अनशनकारियों के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचता है तो इसकी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय और महाविद्यालय प्रशासन की होगी, ऐसा छात्रों ने कहा।