जीविका योजनाओं की डीएम ने की समीक्षा, 'लखपति दीदी' के लक्ष्य जल्द पूरा करने और महिला सशक्तिकरण पर जोर
- Post By Admin on Sep 29 2026
लखीसराय : समाहरणालय परिसर में जिला पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार की अध्यक्षता में जीविका की जिला परियोजना समन्वय इकाई द्वारा आयोजित जिला स्तरीय समिति की एक अहम समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन और जीविका द्वारा संचालित विभिन्न विकास योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को और अधिक प्रभावी व परिणामोन्मुखी बनाना रहा। इस दौरान लखपति दीदी, सतत जीविकोपार्जन योजना, मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना, जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत मत्स्यपालन, जेंडर फोरम और दीदी अधिकार केंद्र (डीएके) की प्रखंडवार प्रगति का गहन विश्लेषण किया गया।
समीक्षा के क्रम में जिलाधिकारी ने 'लखपति दीदी' योजना के तहत बचे हुए लक्ष्यों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करते हुए अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की स्थायी आय वृद्धि के लिए जल-जीवन-हरियाली के अंतर्गत मत्स्यपालन को और सशक्त किया जाए तथा उत्पादित सामग्रियों को स्थानीय एवं बड़े बाजारों से सीधे जोड़ा जाए, ताकि दीदियों को उनके श्रम का बेहतर मूल्य मिल सके। इसके साथ ही बाजार आधारित आजीविका और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया।
सतत जीविकोपार्जन योजना की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि चिह्नित सभी निर्धन और पात्र परिवारों को आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी बुनियादी योजनाओं से जोड़कर पूर्ण संतृप्ति (सैचुरेशन) सुनिश्चित की जाए। इसके अतिरिक्त वीपीआरपी (VPRP) से जुड़े कार्यों में तेजी लाने और प्रखंड स्तर पर सतत मॉनिटरिंग करने को कहा गया। महिला अधिकारों और सुरक्षा पर चर्चा करते हुए उन्होंने जेंडर फोरम तथा दीदी अधिकार केंद्रों को अधिक सक्रिय बनाने का निर्देश दिया, जिससे ग्रामीण महिलाएं विधिक सहायता, सरकारी हकदारियों और शिकायत निवारण तंत्र से सुगमता से जुड़ सकें।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार ने सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों एवं जीविका कर्मियों को लक्ष्य-आधारित कार्यशैली, नियमित क्षेत्रीय अनुश्रवण और आपसी समन्वय के साथ योजनाओं को धरातल पर उतारने का सख्त निर्देश दिया, ताकि महिलाओं के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में ठोस बदलाव लाया जा सके।