बाढ़ राहत शिविर बंद, फिर भी वेतन काटने की तैयारी; बीआरएबीयू के आदेश पर शिक्षक संघों का विरोध

  • Post By Admin on Sep 26 2026
बाढ़ राहत शिविर बंद, फिर भी वेतन काटने की तैयारी; बीआरएबीयू के आदेश पर शिक्षक संघों का विरोध

मुजफ्फरपुर : बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के अंतर्गत बाढ़ राहत कोष में शिक्षकों व शिक्षकेत्तर कर्मियों के एक दिन के मूल वेतन कटौती के विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्देश का शिक्षक संघों ने कड़ा विरोध किया है। 'बूटा' (BUTA) और 'बुस्टा' (BUSTA) ने संयुक्त रूप से कुलपति को पत्र सौंपकर इस एकतरफा व दबावपूर्ण आदेश पर पुनर्विचार करने और शिक्षक संगठनों के साथ वार्ता कर निर्णय लेने की मांग की है।

संघों का कहना है कि विश्वविद्यालय द्वारा 23 सितंबर को जारी पत्रांक के जरिए राहत कोष में अंशदान कटौती को लेकर महज तीन दिनों के भीतर सहमति अथवा असहमति दर्ज करने को कहा गया है। आदेश में यह भी शर्त रखी गई है कि यदि तय समयसीमा में मंतव्य नहीं दिया गया तो स्वतः सहमति मान ली जाएगी। शिक्षक प्रतिनिधियों का तर्क है कि छह सुदूर जिलों में फैले 42 अंगीभूत कॉलेजों के शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए इतने कम समय में मंतव्य देना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। बिना किसी पूर्व विचार-विमर्श के ऐसा निर्णय थोपना पूरी तरह अनुचित है।

ज्ञापन में शिक्षकों की वर्तमान वित्तीय समस्याओं को रेखांकित करते हुए कहा गया है कि कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है, जिससे उन्हें ईएमआई पर चक्रवृद्धि ब्याज व दंड का भुगतान करना पड़ रहा है। लगभग 50 नवनियुक्त शिक्षकों को अनुभव प्रमाण पत्र की जांच और प्रान संख्या के नाम पर जनवरी 2025 से वेतन नहीं मिला है। इसके अलावा, बिना सहमति के नए डिग्री कॉलेजों में प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किए जाने से शिक्षक दोहरे आर्थिक बोझ तले दबे हैं। स्थानांतरण विवाद के कारण उच्च न्यायालय के अनुकूल आदेश के बावजूद कई शिक्षक महीनों से वेतन से वंचित हैं, जबकि कई शिक्षक स्वयं भी बाढ़ प्रभावित इलाकों से आते हैं।

शिक्षक संघों ने पत्र में यह तथ्य भी उजागर किया है कि विश्वविद्यालय आदेश में 'राज्यपाल आपदा कोष' का उल्लेख किया गया है, जबकि विधिवत रूप से केवल 1971 में स्थापित 'मुख्यमंत्री राहत कोष' ही संचालित है। साथ ही, आपदा प्रबंधन विभाग की 25 सितंबर की प्रेस विज्ञप्ति का हवाला देते हुए बताया गया कि वर्तमान में राज्य में बाढ़ की स्थिति सामान्य हो चुकी है और राहत शिविर भी बंद किए जा चुके हैं। संघों ने स्पष्ट किया कि शिक्षक सदैव राष्ट्रीय व राज्य आपदाओं में स्वेच्छा से आगे बढ़कर सहयोग करते रहे हैं, लेकिन वर्तमान आदेश की प्रक्रिया दबावपूर्ण है, इसलिए प्रशासन शिक्षक संघों से संवाद कर ही कोई सर्वसम्मत कदम उठाए।