माता-पिता के आदर्शों को समर्पित तर्पण: पर्यावरण भारती के संस्थापक राम बिलास शाण्डिल्य ने रोपे 1.25 लाख से अधिक पौधे
- Post By Admin on Sep 30 2026
लखीसराय : पितृपक्ष केवल पूर्वजों के प्रति जल अर्पित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके दिए संस्कारों और आदर्शों को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। इसी भाव को आत्मसात करते हुए पर्यावरण भारती के संस्थापक एवं पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के प्रांत संयोजक राम बिलास शाण्डिल्य ने अपने पूज्य माता-पिता की स्मृति में अपने विचार साझा किए हैं।
राम बिलास शाण्डिल्य बताते हैं कि उनके पिता स्व० भागवत शाण्डिल्य जो खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड स्थित बुद्धनगर भरतखंड के एक सरल किसान थे उनके जीवन के प्रथम गुरु, मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत रहे। पिता जी ने बचपन से ही रामायण के आदर्शों पर चलना सिखाया। वे परिवार में श्रीराम जैसा भ्रातृत्व प्रेम, लक्ष्मण जैसा समर्पण और माता सीता जैसी मर्यादा एवं नारी शक्ति के महत्व का उपदेश दिया करते थे।
वहीं उनकी धर्मपरायण माता स्व० सशीला देवी उनके लिए 'गुरु माँ' के समान थीं। माता जी से मिले समाज सेवा और प्रकृति प्रेम के संस्कारों ने ही उन्हें पर्यावरण संरक्षण के मार्ग पर अग्रसर किया। उन्हीं के आशीष और प्रेरणा से वे अब तक 1,25,503 (एक लाख पच्चीस हजार पाँच सौ तीन) पौधों का रोपण कर चुके हैं।
अखिल भारतीय पेड़ उपक्रम टोली के सदस्य राम बिलास शाण्डिल्य का संकल्प है कि यह वृक्षारोपण अभियान अनवरत चलता रहेगा। उनका मानना है कि पितृपक्ष में माता-पिता की सीख को जन-जन तक पहुँचाना और प्रकृति की सेवा करना ही उनके प्रति सबसे बड़ा कर्तव्य और सच्चा तर्पण है।