एलएनटी कॉलेज में छात्र आंदोलनों के इतिहास, चुनौतियों और वर्तमान भूमिका पर हुई चर्चा

  • Post By Admin on Sep 26 2026
एलएनटी कॉलेज में छात्र आंदोलनों के इतिहास, चुनौतियों और वर्तमान भूमिका पर हुई चर्चा

मुजफ्फरपुर : ललित नारायण तिरहुत महाविद्यालय (एलएनटी कॉलेज) के इतिहास विभाग की ओर से 'भारतीय छात्र आंदोलन : ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, वर्तमान चुनौतियां एवं समकालीन प्रासंगिकता’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. ममता रानी तथा उपस्थित अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर की। इसके बाद छात्र आंदोलनों के इतिहास, बदलते स्वरूप और वर्तमान समय में उनकी भूमिका को लेकर वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए।

मुख्य वक्ता बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार ने कहा कि छात्र आंदोलन को केवल राजनीतिक गतिविधि के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसका सामाजिक सरोकार भी रहा है। उन्होंने बंग-भंग आंदोलन से लेकर 1974 के छात्र आंदोलन तक विद्यार्थियों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न दौर में छात्र आंदोलनों ने सामाजिक और राजनीतिक घटनाक्रम को प्रभावित किया है। उनके अनुसार 1974 का छात्र आंदोलन भी देश के घटनाक्रम में महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। डॉ. अजीत कुमार ने वर्तमान दौर को ‘जेन-जी’ का दौर बताते हुए कहा कि तकनीक और वैश्विक संपर्क के कारण छात्र आंदोलनों का स्वरूप भी बदल रहा है। ऐसे समय में छात्र आंदोलनों को तार्किक सोच, संयम और स्पष्ट उद्देश्य के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के यदुनंदन महाविद्यालय के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. अभय कुमार ने भारतीय छात्र आंदोलनों के ऐतिहासिक पक्ष पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने एनएसयूआई, एबीवीपी और एआईडीएसओ सहित विभिन्न छात्र संगठनों की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छात्र संगठनों का राजनीतिक जुड़ाव कई बार आंदोलन के मूल उद्देश्यों को प्रभावित कर सकता है।

मैथिली विभागाध्यक्ष डॉ. विजयेंद्र झा ने कहा कि भारतीय छात्र आंदोलनों ने समय-समय पर ऐसे नेतृत्व को जन्म दिया है, जिसने आगे चलकर देश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने छात्र आंदोलनों को लोकतांत्रिक भागीदारी और नेतृत्व विकास से जोड़कर देखने की बात कही।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. ममता रानी ने कहा कि छात्र देश की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी तार्किक क्षमता और विचार करने की क्षमता को विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जागरूक और तार्किक युवा ही विकसित भारत के निर्माण में सार्थक योगदान दे सकते हैं। इस दौरान प्राचार्या ने अतिथियों का पौधा और शॉल देकर स्वागत किया।

संगोष्ठी के दौरान छात्र-छात्राओं ने वक्ताओं से विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे और संवाद में भाग लिया। इससे कार्यक्रम में छात्रों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम का संचालन डॉ. जय प्रकाश ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रूमा ने प्रस्तुत किया। संगोष्ठी में महाविद्यालय के शिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं अन्य संबंधित लोग उपस्थित रहे।