मूल्यांकन कार्य पूरा होने के बाद भी भुगतान लंबित, शिक्षक प्रतिनिधि ने प्रशासन से की पहल की मांग
- Post By Admin on Sep 27 2026
मुजफ्फरपुर : बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के अंगीभूत एवं संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों के साथ अतिथि शिक्षकों द्वारा कई सेमेस्टर की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन किए जाने के बावजूद कॉपी जांच की पारिश्रमिक राशि का भुगतान लंबित रहने का मामला सामने आया है। शिक्षक प्रतिनिधि डॉ. राजीव कुमार के अनुसार, कई शिक्षकों को छह-सात महीने से मूल्यांकन कार्य की राशि का इंतजार है। भुगतान में देरी को लेकर शिक्षकों में असंतोष बढ़ने की बात कही जा रही है।
श्यामनंदन सहाय महाविद्यालय के शिक्षक प्रतिनिधि डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षकों ने परीक्षा संबंधी जिम्मेदारी निभाते हुए कई सेमेस्टर की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया है। उनके अनुसार, मूल्यांकन कार्य पूरा किए जाने के बाद भी संबंधित पारिश्रमिक का भुगतान अब तक नहीं हो सका है। इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय के कुलसचिव से भी बातचीत की गई है। डॉ. राजीव के मुताबिक, बातचीत के दौरान कुलसचिव की ओर से बताया गया कि भुगतान से संबंधित मामला कुलपति के स्तर पर लंबित है। उन्होंने कहा कि शिक्षक अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियों के साथ परीक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में भी योगदान देते हैं और उत्तरपुस्तिकाओं का समय पर मूल्यांकन इसी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों की आर्थिक स्थिति पहले से चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में समय पर वेतन नहीं मिलने की स्थिति में कॉपी मूल्यांकन से मिलने वाला पारिश्रमिक कई शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए आर्थिक सहारा बनता है। उनका कहना है कि मूल्यांकन कार्य की राशि के लिए छह-सात महीने तक इंतजार करना शिक्षकों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। शिक्षक प्रतिनिधि ने कहा कि जब शिक्षक विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था से जुड़े कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करते हैं, तो उनके पारिश्रमिक का भुगतान भी समय पर किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से लंबित भुगतान की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने और शिक्षकों को उनकी मेहनत की राशि उपलब्ध कराने की मांग की।
डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि शिक्षकों की ओर से किसी प्रकार के टकराव की स्थिति पैदा करना उद्देश्य नहीं है, लेकिन लंबे समय से लंबित भुगतान को लेकर अपनी बात रखना उनका अधिकार है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द भुगतान की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो शिक्षकों का असंतोष आंदोलन का रूप ले सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और राज्यपाल से मुलाकात कर विश्वविद्यालय की स्थिति से अवगत कराएगा तथा लंबित पारिश्रमिक के भुगतान की मांग रखेगा। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से शिक्षकों की आर्थिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए इस मामले में सकारात्मक और शीघ्र पहल करने की अपील की। डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि लंबित भुगतान का समाधान होने से शिक्षकों में व्याप्त असंतोष को दूर करने में मदद मिलेगी और विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था से जुड़े कार्यों में भी सकारात्मक वातावरण बना रहेगा।