हिंदी कविता और सामाजिक बदलाव पर आरडीएस कॉलेज में संगोष्ठी, ‘रश्मिरथी’ पर हुई चर्चा
- Post By Admin on Sep 30 2026
मुजफ्फरपुर : रामदयालु सिंह महाविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से “हिंदी कविता का जनमानस पर बदलावकारी प्रभाव और चेतना का प्रसार” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विशेष संदर्भ रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध कृति ‘रश्मिरथी’ रहा। कार्यक्रम में प्रख्यात चिंतक और कवि मदन कश्यप मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. रमेश प्रसाद गुप्ता ने की, जबकि मंच संचालन डॉ. मनोज कुमार सिंह ने किया। हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. नीरज कुमार मिश्र ने विषय प्रवेश कराते हुए सामाजिक बदलाव और जनचेतना के निर्माण में हिंदी कविता की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कविता के माध्यम से समाज में पैदा होने वाली वैचारिक जागरूकता और उसके व्यापक प्रभावों को रेखांकित किया।
मुख्य वक्ता मदन कश्यप ने तुलसीदास के समय से लेकर रामधारी सिंह दिनकर तक हिंदी कविता की विकास यात्रा और उसके सामाजिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि एक महान कवि की भूमिका हमेशा प्रतिपक्ष की होती है। कवि अपने समय की सामाजिक परिस्थितियों, विसंगतियों और सवालों को अपनी रचनाओं के माध्यम से सामने लाता है तथा जनमानस को सोचने और बदलाव की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने दिनकर की काव्य चेतना और उनकी रचनाओं में मौजूद सामाजिक सरोकारों को रेखांकित करते हुए ‘रश्मिरथी’ के महत्व पर भी चर्चा की। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि हिंदी कविता केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि वह समाज में चेतना, विचार और परिवर्तन की जमीन तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. रमेश प्रसाद गुप्ता ने कवि के भीतर मौजूद अंतर्विरोधों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि एक कवि को कई बार स्वयं के विरुद्ध भी खड़ा होना पड़ता है। उनके अनुसार रचनाकार के लिए अपने भीतर के प्रश्नों और अंतर्विरोधों से जूझना उसकी रचनात्मक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। संगोष्ठी के दौरान हिंदी कविता, सामाजिक चेतना और जनमानस के बीच संबंध को लेकर विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को हिंदी कविता के सामाजिक सरोकारों तथा उसके प्रभावों को समझने का अवसर प्रदान किया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. दिव्या ने धन्यवाद ज्ञापन किया। संगोष्ठी में इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. एन.एम. रजवी के अलावा डॉ. रजनीकांत पांडे, डॉ. बिंदु कुमारी, डॉ. अमृता, डॉ. प्रियंका, डॉ. हसन राजा, डॉ. ललित किशोर, डॉ. भगवान कुमार, डॉ. अनुराधा पाठक, डॉ. स्नेहलता, डॉ. भैरवी, डॉ. आरती, डॉ. अमरज्योति, डॉ. आरती कुमारी, डॉ. आशुतोष मिश्रा, डॉ. संजय चौधरी, डॉ. सी.के. झा, डॉ. नियाज़, डॉ. प्रवाल चटर्जी, डॉ. सूरज, डॉ. संध्या कुमारी, डॉ. पूनम कुमारी सहित महाविद्यालय के कई शिक्षक उपस्थित रहे।