नुक्कड़ नाटक से ‘वॉल ऑफ होप’ तक, एमडीडीएम कॉलेज में मानसिक स्वास्थ्य पर अनूठी पहल
- Post By Admin on Oct 10 2026
मुजफ्फरपुर : विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर एमडीडीएम कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग की ओर से ‘माइंडस्केप 2026’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके तहत पूरे सप्ताह छात्राओं के बीच मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, भावनाओं की अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने और सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए विभिन्न रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की गईं। कार्यक्रम में सैकड़ों छात्राओं ने भाग लेकर मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझने और इससे जुड़े सामाजिक भ्रम दूर करने की पहल में सहभागिता की।
प्राचार्या प्रो. अलका जायसवाल के संरक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और आत्म-जागरूकता के प्रति संवेदनशील बनाना था। आयोजन के दौरान नुक्कड़ नाटक, ‘वॉल ऑफ होप’, ‘मेरी कहानी, मेरा अनुभव’ कहानी लेखन प्रतियोगिता, ‘इमोशन अन्ताक्षरी’, ‘ह्यूमन चेन फॉर्मेशन’ और मानसिक स्वास्थ्य के स्वमूल्यांकन जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं।
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से छात्राओं ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने समाज में मानसिक समस्याओं को लेकर प्रचलित भ्रांतियों और नकारात्मक धारणाओं को दूर करने का संदेश दिया। वहीं, ‘वॉल ऑफ होप’ गतिविधि में छात्राओं ने आशा, आत्मविश्वास, सकारात्मकता और भावनात्मक सहयोग से जुड़े प्रेरक संदेश लिखे। इस पहल का उद्देश्य कॉलेज परिसर में ऐसा वातावरण तैयार करना था, जहां छात्राएं अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त कर सकें और एक-दूसरे को सहयोग दे सकें।
‘मेरी कहानी, मेरा अनुभव’ शीर्षक से आयोजित कहानी लेखन प्रतियोगिता में छात्राओं को अपने जीवन के अनुभवों, संघर्षों, भावनाओं और चुनौतियों से उबरने की कहानियों को रचनात्मक रूप में प्रस्तुत करने का अवसर मिला। इस गतिविधि के जरिए आत्म-अभिव्यक्ति, आत्म-स्वीकृति और भावनात्मक समझ को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। ‘इमोशन अन्ताक्षरी’ गतिविधि के माध्यम से छात्राओं ने विभिन्न भावनाओं को पहचानने, समझने और उन्हें उचित तरीके से व्यक्त करने का अभ्यास किया। दूसरी ओर, ‘ह्यूमन चेन फॉर्मेशन’ के जरिए एकजुटता, आपसी सहयोग और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य के स्वमूल्यांकन की गतिविधि भी शामिल रही। इसके माध्यम से छात्राओं को अपनी भावनात्मक स्थिति, तनाव के स्तर और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी आवश्यकताओं को समझने के लिए प्रोत्साहित किया गया। यह गतिविधि आत्म-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी, न कि किसी चिकित्सकीय निदान के लिए।
आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। मानसिक तनाव या भावनात्मक कठिनाइयों से जूझ रहे लोगों के प्रति सहानुभूति और संवेदनशीलता रखनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर सहायता लेना कमजोरी नहीं, बल्कि आत्म-देखभाल और साहस का परिचायक है। छात्राओं को अपनी भावनाओं को समझने, सकारात्मक संवाद स्थापित करने और आवश्यकता पड़ने पर मदद लेने के लिए भी प्रेरित किया गया।
मनोविज्ञान विभाग की प्राध्यापिकाओं के सहयोग से आयोजित ‘माइंडस्केप 2026’ ने कॉलेज परिसर में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता, संवाद और पारस्परिक सहयोग की संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास किया। कार्यक्रम का समापन 13 अक्टूबर 2026 को माइंडफुलनेस सत्र के साथ होगा। इस अवसर पर विभिन्न गतिविधियों में विजेता छात्राओं को पुरस्कृत भी किया जाएगा।