छात्र शक्ति के आगे झुका विवि प्रशासन: 170 घंटे की भूख हड़ताल के बाद 10 सूत्रीय मांगों पर लिखित मुहर
- Post By Admin on Oct 07 2026
मुजफ्फरपुर : लंगट सिंह महाविद्यालय एवं बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय के छात्र अधिकारों तथा 10 सूत्रीय बुनियादी मांगों को लेकर पिछले आठ दिनों यानी 170 से अधिक घंटों से जारी ऐतिहासिक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का आज सुखद और ऐतिहासिक पटाक्षेप हो गया। छात्र एकता, त्याग और अटूट संकल्प के आगे विश्वविद्यालय प्रशासन को आखिरकार झुकना पड़ा और छात्रों की मांगों पर आधिकारिक लिखित अधिसूचना जारी कर दी गई, जिससे छात्र समुदाय में हर्षोल्लास का माहौल है।
भूख हड़ताल के आठवें दिन सुबह 10:00 बजे से ही विश्वविद्यालय परिसर में अभूतपूर्व प्रशासनिक हलचल देखने को मिली। नगर आयुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम), नगर पुलिस अधीक्षक (सिटी एसपी), आईपीएस अधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी), थानाध्यक्ष (एसएचओ) और दंडाधिकारी भारी पुलिस बल के साथ दिनभर मौके पर मुस्तैद रहे। छात्र प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच लगभग 5 से 6 दौर की मैराथन वार्ताएं चलीं। प्रशासनिक अमले ने छात्रावासों का भौतिक निरीक्षण किया तथा समाधान निकालने के लिए कुलपति आवास एवं प्राचार्या आवास पर कई दौर की गहन बातचीत हुई।
आंदोलन के इस निर्णायक मोड़ पर माननीय सांसद डॉ. राजभूषण निषाद सीधे धरना स्थल पर पहुंचे और अनशनकारी छात्रों से आत्मीय संवाद स्थापित किया। छात्रों की जायज मांगों को सुनने के उपरांत वे स्वयं कुलपति आवास गए और विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। सांसद के कड़े हस्तक्षेप के फलस्वरूप विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा छात्रावास आवंटन की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से प्रारंभ करने तथा सभी 10 सूत्रीय बुनियादी मांगों को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की आधिकारिक लिखित अधिसूचना (ऑफिशियल रिटेन नोटिफिकेशन) जारी कर दी गई।
इस पूरे आंदोलन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अमर बाबू ने अनशन के प्रथम दिन से ही लगातार छात्रों की मांगों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस ऐतिहासिक जीत को हासिल करने में अमर बाबू की भूमिका अत्यंत अहम और सराहनीय रही है।
लिखित आदेश जारी होने के बाद माननीय सांसद डॉ. राजभूषण निषाद ने छात्रों के समक्ष व्यक्तिगत गारंटी लेते हुए घोषणा की कि छात्रों की सभी मांगों को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने की संपूर्ण ज़िम्मेदारी वे स्वयं अपने ऊपर लेते हैं और छात्रों के साथ किसी भी सूरत में अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
सांसद की इस व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी और विश्वविद्यालय के आधिकारिक आदेश के उपरांत माननीय सांसद महोदय एवं उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों अनशनकारी छात्रों को स्वयं अपने हाथों से जूस पिलाकर 8 दिनों से चला आ रहा अनशन विधिवत समाप्त कराया। अनशन टूटते ही पूरा विश्वविद्यालय परिसर 'छात्र एकता ज़िंदाबाद' और 'इंकलाब ज़िंदाबाद' के गगनभेदी नारों से गुंजायमान हो उठा। इसके बाद सैकड़ों की संख्या में मौजूद आंदोलनकारी छात्रों ने पूरे आठ दिनों तक मुस्तैद रहे पुलिस-प्रशासन, दंडाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विभिन्न छात्र संगठनों एवं मीडियाकर्मियों के सकारात्मक सहयोग के प्रति सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त किया।