राष्ट्रपति मुर्मू से मिले विपक्षी नेता, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने समेत रखीं चार मांगें
- Post By Admin on Oct 10 2026
नई दिल्ली : मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर सवाल उठा रहे विपक्षी दलों के नेताओं ने शुक्रवार शाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव सहित विपक्षी प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर हस्तक्षेप की मांग की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्ष का विरोध लगातार तेज हो रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल में कुल 10 नेता शामिल थे। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल हैं। नेताओं ने राष्ट्रपति के सामने अपनी चिंताएं रखते हुए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग की।
विपक्ष ने ज्ञापन में रखीं चार प्रमुख मांगें
राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में विपक्ष ने चार प्रमुख मांगें रखीं। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया रोकने, चुनाव में मतपत्रों की व्यवस्था फिर से लागू करने और पिछले दो वर्षों में हुए चुनावों की समीक्षा कराने की मांग शामिल है।
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव से पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उनका कहना है कि निर्वाचन प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए शिकायतों की निष्पक्ष जांच और पारदर्शी व्यवस्था जरूरी है। हालांकि, ये विपक्षी दलों के आरोप और मांगें हैं। निर्वाचन आयोग ने अपनी प्रक्रियाओं को निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप बताया है।
मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने क्या कहा?
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अपने आरोपों और चिंताओं को राष्ट्रपति के सामने रखा। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति ने उनकी बातों को खारिज नहीं किया और उनसे आरोपों के समर्थन में प्रमाण देने को कहा। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष अपने दावों से जुड़े साक्ष्य राष्ट्रपति के समक्ष पेश करेगा।
हालांकि, राष्ट्रपति भवन की ओर से बातचीत का विस्तृत आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया। वहीं, सरकारी सूत्रों ने राहुल गांधी के इस दावे पर आपत्ति जताई कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के आरोपों को स्वीकार किया था। इस तरह मुलाकात के बाद राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी सामने आई है।
एसआईआर को लेकर कई दिनों से विरोध
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दलों का विरोध पिछले कई दिनों से जारी है। विपक्ष के सांसदों ने दिल्ली में मार्च और धरना-प्रदर्शन के जरिए निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। इससे पहले कुछ नेताओं को पुलिस ने मार्च के दौरान हिरासत में भी लिया था। बाद में विपक्षी नेताओं ने राजघाट पर एकत्र होकर अपना विरोध दर्ज कराया।
विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में यदि पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं, तो इसकी जांच होनी चाहिए। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण दोहराव और अपात्र प्रविष्टियों को हटाने सहित वैधानिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है। विवाद के केंद्र में यह सवाल है कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के अधिकार किस तरह सुरक्षित रखे जाएं।
अब सर्वोच्च न्यायालय जाने की तैयारी
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा कि विपक्षी नेता सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश से मिलने और उन्हें ज्ञापन सौंपने का प्रयास करेंगे। विपक्ष इस मामले को न्यायिक स्तर पर भी उठाना चाहता है। इससे संकेत मिलता है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक तथा कानूनी स्तर पर बहस आगे बढ़ सकती है।
फिलहाल राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन पर किसी औपचारिक निर्णय या मांगों को स्वीकार किए जाने की घोषणा सामने नहीं आई है। विपक्षी दलों ने अपने आरोपों के समर्थन में प्रमाण देने की बात कही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष अपने साक्ष्य किस रूप में प्रस्तुत करता है और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं।