लखीसराय में दुर्गा पूजा पंडालों के लिए फायर सेफ्टी गाइडलाइन जारी, निरीक्षण शुरू
- Post By Admin on Oct 13 2026
लखीसराय : दुर्गा पूजा महोत्सव के दौरान अग्नि हादसों की रोकथाम और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर बिहार अग्निशमन सेवा पूरी तरह मुस्तैद हो गई है। जिला अग्निशमन पदाधिकारी विनोद कुमार यादव के निर्देश पर अनुमंडल अग्निशमालय पदाधिकारी लखीसराय, सुश्री विनिता लता द्वारा विभिन्न पूजा पंडालों का स्थलीय निरीक्षण किया जा रहा है। इस दौरान सभी पंडालों में पर्याप्त अग्निशमन व्यवस्था सुनिश्चित कराने के साथ ही पूजा समिति के अध्यक्षों व सचिवों को "क्या करें और क्या न करें" से संबंधित विस्तृत गाइडलाइन जारी कर उसका शत-प्रतिशत अनुपालन करने की सख्त हिदायत दी गई है। किसी भी संभावित आपात स्थिति से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए मॉक ड्रिल व जनजागरूकता अभियानों का आयोजन कर लोगों को प्रशिक्षित किया जा रहा है और सुरक्षा संबंधी पर्चे भी बांटे जा रहे हैं।
विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार पूजा पंडालों का निर्माण भारतीय मानक ब्यूरो (आई.एस. 8758-1993) के अनुरूप ही किया जाना अनिवार्य है। पंडाल निर्माण में फायर रिटार्डेंट सॉल्यूशन से उपचारित सूती कपड़ों का उपयोग होना चाहिए। इसके अलावा पंडाल की ऊंचाई किसी भी स्थिति में तीन मीटर से कम नहीं होनी चाहिए और निर्माण में सिंथेटिक सामग्री या रस्सियों का प्रयोग पूरी तरह वर्जित रहेगा। पंडाल को रेलवे लाइन, विद्युत सब-स्टेशन, चिमनी अथवा ईंट-भट्ठों से कम से कम 15 मीटर दूर तथा बिजली की मुख्य तारों के नीचे कतई न बनाने का आदेश है। पंडाल के चारों ओर 4 से 5 मीटर का खुला स्थान होना जरूरी है तथा निकासी के लिए कम से कम तीन द्वार (एक सामने और दो अगल-बगल) अनिवार्य रूप से बनाए जाने चाहिए।
विद्युत सुरक्षा और अग्नि नियंत्रण को लेकर अग्निशमन विभाग ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक 100 वर्ग मीटर के क्षेत्रफल पर 9 लीटर क्षमता वाला अग्निशामक यंत्र अवश्य स्थापित किया जाए। पंडाल में विद्युत वायरिंग की उचित टेपिंग हो, तार संभवतः पीवीसी पाइप से गुजारे जाएं और सर्किट ब्रेकर (फ्यूज) की व्यवस्था रहे। किसी भी स्थिति में नंगे तार न छोड़े जाएं और हैलोजन लाइट पंडाल के भीतर न लगाई जाए। बिजली कटने पर मोमबत्ती या दीये की जगह स्पार्कलेस लाइट का उपयोग करने, अस्थाई रसोईघर को पंडाल से न्यूनतम 200 मीटर दूर रखने तथा हवन कुंड के समीप 1000 लीटर क्षमता वाले पानी के बड़े ड्रम, बाल्टी और मग की व्यवस्था रखने को कहा गया है। पंडाल परिसर में धूम्रपान पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा और अगरबत्ती, आरती व दीये जलाते समय एक व्यक्ति की विशेष निगरानी अनिवार्य होगी। रावण दहन के लिए भी सुरक्षा घेरा बनाने और स्थानीय अग्निशमन केंद्र का दूरभाष नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित करने का निर्देश दिया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना पर नागरिक तत्काल 101 या 112 डायल कर सहायता प्राप्त कर सकें।