बिहार निर्माता डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा का पटना में बने स्मारक, कमल किशोर ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
- Post By Admin on Oct 05 2026
पटना: ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष-सह-राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी कमल किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर बिहार के प्रमुख निर्माताओं में शामिल डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा की स्मृति में राजधानी पटना में स्मारक स्थल बनाने और उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि डॉ. सिन्हा के योगदान को स्थायी रूप से याद रखने के लिए स्मारक का निर्माण नई पीढ़ी को उनके योगदान से परिचित कराने का माध्यम बनेगा।
डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा संविधान सभा की पहली बैठक की अध्यक्षता करने वाले वरिष्ठतम सदस्य थे। 9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक में उन्होंने अस्थायी अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था। 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
कमल किशोर ने अपने पत्र में कहा कि डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा का जीवन बिहार के निर्माण से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन, पत्रकारिता, शिक्षा, राजनीति और संविधान निर्माण तक विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़ा रहा। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तित्व की स्मृति में पटना में समर्पित स्मारक और आदमकद प्रतिमा का निर्माण ऐतिहासिक योगदान को सार्वजनिक रूप से स्मरण करने का एक माध्यम हो सकता है। डॉ. सिन्हा का पत्रकारिता से भी गहरा संबंध रहा। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार ‘बिहार टाइम्स’ से उनका जुड़ाव रहा और बाद में ‘बिहारी’ नाम से प्रकाशित पत्र भी बिहार के हितों से जुड़े मुद्दों को सामने लाता रहा। 1918 में ‘द सर्चलाइट’ के अस्तित्व में आने के बाद यह समाचार पत्र स्वतंत्रता आंदोलन और जिम्मेदार शासन की मांग से जुड़े विमर्श का महत्वपूर्ण माध्यम बना। शिक्षा के क्षेत्र में भी डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे 1936 से 1944 तक पटना विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। उनकी पत्नी राधिका सिन्हा की स्मृति में स्थापित सिन्हा इंस्टीट्यूट एंड लाइब्रेरी आज भी उनके शैक्षिक और सामाजिक योगदान की विरासत से जुड़ी है।कमल किशोर ने कहा कि डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा वकील, पत्रकार, शिक्षाविद्, प्रशासक और समाजसेवी के रूप में सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे। पटना उच्च न्यायालय से जुड़े आधिकारिक अभिलेखों में भी उन्हें संविधान सभा का प्रथम अध्यक्ष बताया गया है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि पटना में उपयुक्त स्थान का चयन कर डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा की स्मृति में स्मारक स्थल विकसित किया जाए और वहां उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित की जाए। कमल किशोर के अनुसार, इससे बिहार के इतिहास और डॉ. सिन्हा के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी तथा बिहार निर्माण और संविधान निर्माण में उनके योगदान को सार्वजनिक स्मृति में उचित स्थान मिल सकेगा।