कम बारिश और बढ़ती गर्मी ने बढ़ाया बिजली संकट, सितंबर में मांग रही रिकॉर्ड स्तर पर

  • Post By Admin on Oct 02 2026
कम बारिश और बढ़ती गर्मी ने बढ़ाया बिजली संकट, सितंबर में मांग रही रिकॉर्ड स्तर पर

नई दिल्ली : देश में सितंबर 2026 के दौरान बिजली की कमी तीन साल से अधिक समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, महीने में बिजली की कमी करीब 560 मिलियन किलोवाट-घंटे रही, जो अगस्त 2023 के बाद सबसे अधिक बताई गई है। इस दौरान औद्योगिक गतिविधियों, गर्म मौसम और बिजली की बढ़ती मांग ने आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ाया।

सितंबर में देश की कुल बिजली खपत पिछले साल के मुकाबले 11.3 प्रतिशत बढ़कर करीब 162 अरब यूनिट पहुंच गई। इसी दौरान बिजली की अधिकतम मांग भी बढ़ी और महीने में पूरी की गई अधिकतम मांग 269 गीगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। बिजली की बढ़ी हुई जरूरत में ठंडक, सिंचाई और औद्योगिक गतिविधियों की मांग का योगदान रहा। बिजली की मांग बढ़ने के साथ कोयले से बिजली उत्पादन पर भी निर्भरता बढ़ी। सितंबर में कोयला आधारित बिजली उत्पादन सालाना आधार पर 13.3 प्रतिशत बढ़ा और कुल बिजली उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी करीब 66.03 प्रतिशत रही। दूसरी ओर, नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में भी वृद्धि हुई, लेकिन कुल बिजली उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत रही।

कम बारिश का असर जलविद्युत उत्पादन पर भी पड़ा। कमजोर मानसून के कारण कई जलाशयों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हुई, जिससे जलविद्युत उत्पादन में गिरावट आई। रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में जलविद्युत उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में करीब 16 प्रतिशत कम रहा। इस कमी की भरपाई के लिए कोयला आधारित बिजली संयंत्रों पर दबाव बढ़ा। बिजली की बढ़ती मांग के बीच ईंधन आपूर्ति भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनी रही। अलग-अलग सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 40 प्रतिशत कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में ईंधन का भंडार गंभीर रूप से कम स्तर पर था। हालांकि सितंबर में कोयला उत्पादन और बिजली क्षेत्र को आपूर्ति में वृद्धि दर्ज की गई।

ऊर्जा क्षेत्र के लिए सितंबर के आंकड़े इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि मानसून के कमजोर रहने और तापमान तथा औद्योगिक मांग में वृद्धि के बीच बिजली की मांग ऊंचे स्तर पर बनी रही। आने वाले समय में कोयला आपूर्ति, जलविद्युत उत्पादन और बिजली की मांग के बीच संतुलन पर नजर रहेगी।