रुबियो और जयशंकर की मुलाकात में व्यापार व ऊर्जा पर चर्चा, समझौते पर नजर
- Post By Admin on Oct 20 2026
मुंबई : भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में तेजी आई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को मुंबई में मुलाकात कर व्यापार, ऊर्जा, निवेश, रक्षा और तकनीकी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। बैठक के बाद रुबियो ने संकेत दिया कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं, हालांकि कुछ मुद्दों पर सहमति बनना अभी बाकी है।
समझौते को लेकर यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब दोनों देश अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिकी पक्ष की ओर से हाल के दिनों में व्यापार वार्ता में प्रगति के संकेत दिए गए हैं। हालांकि, समझौते पर हस्ताक्षर होने की तारीख या अंतिम शर्तों को लेकर अभी औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
शुल्क और बाजार तक पहुंच पर बनी हुई है नजर
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में आयात शुल्क और बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। वर्ष 2025 में भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी शुल्क बढ़ाए जाने के बाद दोनों देशों के कारोबारी संबंधों में तनाव आया था। बाद में कुछ शुल्कों में बदलाव किया गया और बातचीत आगे बढ़ी। भारत चाहता है कि उसके निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी अवसर मिलें, जबकि अमेरिका भी भारतीय बाजार में अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाने में रुचि रखता है। व्यापार समझौते से दोनों देशों के कारोबारियों को लाभ मिलने की संभावना है, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव समझौते की अंतिम शर्तों पर निर्भर करेगा। जब तक दोनों सरकारें आधिकारिक घोषणा नहीं करतीं, तब तक इसे पूरा हुआ समझौता नहीं माना जा सकता।
रूस से तेल खरीद भी चर्चा का अहम मुद्दा
भारत की ऊर्जा जरूरतों और रूस से कच्चे तेल की खरीद पर भी बातचीत का असर पड़ सकता है। भारत अपनी बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न देशों से तेल आयात करता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में रूसी तेल खरीद से जुड़े संभावित अतिरिक्त शुल्कों में राहत दी है। इससे भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में मौजूद एक प्रमुख बाधा कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
रुबियो ने कहा कि अमेरिका भारत की ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने में सहयोग कर सकता है। भारत के लिए ऊर्जा की उपलब्धता और कीमत दोनों महत्वपूर्ण हैं, इसलिए इस विषय पर होने वाली बातचीत का असर भविष्य की व्यापारिक और रणनीतिक साझेदारी पर पड़ सकता है।
रिलायंस और वेनेजुएला के तेल पर भी चर्चा
भारत यात्रा के दौरान रुबियो ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को वेनेजुएला के कच्चे तेल के प्रसंस्करण में अधिक भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करने की योजना का उल्लेख किया। उन्होंने वेनेजुएला में तेल उत्पादन से जुड़ी संभावित भागीदारी की संभावना भी जताई। रिलायंस का गुजरात के जामनगर में बड़ा तेल शोधन परिसर है, जहां विभिन्न प्रकार के कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया जाता है। हालांकि, वेनेजुएला में निवेश या उत्पादन को लेकर किसी नए समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस विषय को फिलहाल अमेरिकी पक्ष की पहल और प्रस्ताव के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
आगे क्या होगा?
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अब दोनों देशों की आगे की बातचीत पर नजर रहेगी। शुल्क, ऊर्जा व्यापार, निवेश और बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दों पर सहमति बनने के बाद ही समझौते की अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी। यदि दोनों पक्ष शेष मुद्दों को सुलझा लेते हैं, तो यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि वार्ता आगे बढ़ी है, लेकिन समझौते के पूरा होने की औपचारिक पुष्टि अभी बाकी है।