आरडीएस कॉलेज में ‘समकालीन विश्व में गांधी’ विषय पर संगोष्ठी, 'आइडिया ऑफ भारत' पुस्तक का हुआ लोकार्पण
- Post By Admin on Oct 01 2026
मुजफ्फरपुर : रामदयालु सिंह महाविद्यालय के इतिहास विभाग के तत्वावधान में ‘समकालीन विश्व में गांधी’ विषय पर एक विचारोत्तेजक विभागीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में महात्मा गांधी के व्यक्तित्व, राजनीतिक एवं सामाजिक दर्शन तथा वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में उनके विचारों की प्रासंगिकता पर प्राध्यापकों और विद्यार्थियों ने गहन विमर्श किया। कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत डॉ. अजमत अली के निर्देशन में तैयार पुस्तक ‘आइडिया ऑफ भारत’ के गरिमामयी लोकार्पण के साथ हुई, जिसमें भारत की सांस्कृतिक चेतना और समकालीन वैचारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला गया।
मुख्य वक्ता के रूप में इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. एम.एन. रजवी ने मोहनदास से महात्मा बनने तक के ऐतिहासिक सफर को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह और जनभागीदारी पर आधारित गांधी का राजनीतिक चिंतन भौगोलिक सीमाओं से परे पूरी दुनिया की सामाजिक व राजनीतिक चेतना को प्रभावित करता है। वहीं, डॉ. अजमत अली ने गांधी को सामाजिक चेतना का अग्रदूत बताते हुए कहा कि उनका दर्शन अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों की रक्षा का मार्ग दिखाता है।
गांधी के वैचारिक विस्तार पर चर्चा करते हुए डॉ. ललित किशोर ने स्पष्ट किया कि बापू के चिंतन पर पाश्चात्य दार्शनिकों और वैश्विक साहित्य का भी गहरा प्रभाव रहा, जिसने उन्हें एक ‘ग्लोबल गांधी’ के रूप में पहचान दिलाई। डॉ. मनीष कुमार शर्मा ने आज के दौर में बढ़ती हिंसा, असमानता और तनाव के समाधान के रूप में गांधीवादी सहिष्णुता को अपरिहार्य बताया। संगोष्ठी में डॉ. अनुपम कुमार और डॉ. रविंद्र कुमार ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि गांधी को महज इतिहास का पन्ना मानने के बजाय आधुनिक वैश्विक चुनौतियों के समाधान के रूप में देखा जाना चाहिए।
इस संगोष्ठी की मुख्य विशेषता विद्यार्थियों की जीवंत सहभागिता रही, जहाँ शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं ने गांधी दर्शन पर अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने युवाओं के विश्लेषणात्मक चिंतन की भूरि-भूरि प्रशंसा की। इस बौद्धिक परिचर्चा में इतिहास विभाग के शिक्षक, शोधार्थी और करीब 200 छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।