पाँच परिवर्तन की झांकी और दीप प्रज्वलन के साथ प्रांतीय प्रधानाचार्य सम्मेलन का भव्य शुभारंभ

  • Post By Admin on Feb 12 2026
पाँच परिवर्तन की झांकी और दीप प्रज्वलन के साथ प्रांतीय प्रधानाचार्य सम्मेलन का भव्य शुभारंभ

मुजफ्फरपुर : प्रांतीय प्रधानाचार्य सम्मेलन का शुभारंभ बुधवार को “पाँच परिवर्तन” विषय पर आधारित भव्य एवं प्रेरणादायी झांकी के समक्ष सामूहिक दीप प्रज्वलन के साथ अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। झांकी में प्रदर्शित पाँचों उद्देश्यों के समक्ष उपस्थित अतिथियों, शिक्षकगण एवं प्रधानाचार्यों ने दीप प्रज्वलित कर सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक एवं प्रधानाचार्य उपस्थित रहे तथा देशभक्ति के नारों से संपूर्ण परिसर राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत नजर आया।

दीप प्रज्वलन के पश्चात चार दिवसीय सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत करने हेतु मंच पर सभी प्रमुख पदाधिकारी एवं वक्ता विराजमान रहे। मंच की गरिमा बढ़ाते हुए लोक शिक्षा समिति के प्रदेश सचिव श्री रामलाल सिंह, मुख्य वक्ता बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के कुलपति डॉ. दिनेश चंद्र राय, लोक शिक्षा समिति के महामंत्री एवं शिक्षाविद् डॉ. कृष्णवीर सिंह शाक्य तथा क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री ख्यालीराम उपस्थित रहे।

लोक शिक्षा समिति के प्रदेश सचिव श्री रामलाल सिंह ने 11 से 14 तारीख को आयोजित होने वाले चार दिवसीय सम्मेलन की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इन दिनों में इस विषय पर गहन मंथन किया जाएगा कि सरस्वती विद्या मंदिर एवं सरस्वती शिशु मंदिर से निकलने वाले भैया-बहन किस प्रकार राष्ट्र, समाज और देश को सशक्त, संस्कारित एवं व्यवस्थित बनाने में अपनी भूमिका निभा सकें।

मुख्य वक्ता डॉ. दिनेश चंद्र राय ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि शिक्षा और शिक्षक राष्ट्र निर्माण के सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि सरस्वती विद्या मंदिर का उद्देश्य केवल शैक्षणिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में चरित्र, संस्कार और सेवा भाव का निर्माण करना है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक हम अपने गाँव और समाज को सुदृढ़ नहीं करेंगे, तब तक भारतीय संस्कारों को मजबूत करना संभव नहीं है। साथ ही उन्होंने प्रधानाचार्य की भूमिका को केवल प्रशासनिक न मानते हुए उसे समाज को दिशा देने वाली आस्था बताया।

इसके पश्चात लोक शिक्षा समिति के महामंत्री डॉ. सुबोध कुमार ने अध्यक्षीय उद्बोधन में वर्तमान शैक्षिक चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मोबाइल फोन समय की बर्बादी का एक बड़ा कारण बनता जा रहा है, जिससे परिवार, संस्कार और सामाजिक दायित्व प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने सभी से संयमित और विवेकपूर्ण उपयोग का आह्वान किया।

तत्पश्चात लोक शिक्षा समिति के महामंत्री एवं शिक्षाविद् डॉ. कृष्णवीर सिंह शाक्य ने शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षक की केंद्रीय भूमिका और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर अपने विचार रखते हुए उपस्थित प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को प्रेरित किया।

कार्यक्रम में विशिष्ट उद्बोधन क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री ख्यालीराम का रहा। उन्होंने संगठन, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षण संस्थान समाज की रीढ़ हैं और सशक्त राष्ट्र की नींव यहीं से पड़ती है।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के सचिव डॉ. ललित किशोर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मंचासीन अतिथियों, वक्ताओं, आयोजकों, प्रधानाचार्यों, शिक्षकगण, स्वयंसेवकों एवं सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में सामूहिक चिंतन और संकल्प का मंच है, जिसकी सीख को व्यवहार में उतारना सभी शिक्षकों की जिम्मेदारी है।