इंडोनेशिया को मिलेगा भारत का ब्रह्मोस कवच, दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते
- Post By Admin on Jul 07 2026
जकार्ता : भारत और इंडोनेशिया के बीच रणनीतिक और रक्षा सहयोग को नई मजबूती मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियान्टो के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में ब्रह्मोस और एस्ट्रा मिसाइलों की आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला और प्रौद्योगिकी सहयोग समेत कई अहम समझौतों पर सहमति बनी। दोनों देशों ने करीब एक दर्जन समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
तीन देशों के दौरे के पहले चरण में जकार्ता पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत किया गया। वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने 2018 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी (कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप) को और आगे बढ़ाने पर जोर दिया। सूत्रों के अनुसार, इंडोनेशिया ने भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के साथ-साथ हवा से हवा में मार करने वाली स्वदेशी एस्ट्रा मिसाइल खरीदने का निर्णय लिया है। यह समझौता वियतनाम और फिलीपींस के बाद भारत की रक्षा निर्यात क्षमता को एक और बड़ी सफलता माना जा रहा है। हालांकि, इंडोनेशिया को दी जाने वाली मिसाइलों की संख्या का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है।
बैठक में दोनों देशों ने स्टील, निकल और रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने पर भी सहमति जताई। भारत इंडोनेशिया में स्टील, निकल और रेयर अर्थ मैग्नेट के उत्पादन से जुड़े क्षेत्रों में निवेश करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों की मजबूत सप्लाई चेन समय की आवश्यकता है।भारत और इंडोनेशिया ने मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित रणनीतिक महत्व के सबांग बंदरगाह के संयुक्त विकास पर भी सहमति व्यक्त की। इसके अलावा रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन, औद्योगिक सहयोग, ब्लू इकोनॉमी, समुद्री व्यापार और बंदरगाह विकास को बढ़ावा देने के लिए भी समझौते किए गए।
प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि इंडोनेशिया में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) बेंगलुरु का एक परिसर स्थापित किया जाएगा। साथ ही भारत के यूपीआई भुगतान प्रणाली को इंडोनेशिया के डिजिटल भुगतान नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में भी सहमति बनी, जिससे व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति सहित वैश्विक चुनौतियों पर भी चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में संवाद और कूटनीति ही स्थायी समाधान का मार्ग है। उन्होंने फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत की दो-राष्ट्र समाधान (टू-स्टेट सॉल्यूशन) और दीर्घकालिक शांति के प्रति प्रतिबद्धता भी दोहराई।