पटना में प्रदर्शन के बाद तनाव, छात्र संगठन आज से अनिश्चितकालीन धरने पर
- Post By Admin on Jul 23 2026
पटना : बिहार की राजधानी पटना में बुधवार को छात्रों का प्रदर्शन हिंसक हो गया। नीट पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बड़ी संख्या में छात्र राजभवन मार्च के लिए निकले। प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर छात्रों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई, जिसमें दोनों पक्षों के कई लोग घायल हो गए। हालात को देखते हुए गुरुवार को भी पुलिस हाई अलर्ट पर है, जबकि छात्र संगठन AISA ने गांधी मैदान में अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान किया है।
बुधवार सुबह करीब 10 बजे गांधी मैदान से शुरू हुआ प्रदर्शन जेपी गोलंबर पहुंचते ही उग्र हो गया। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर छात्रों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ दिए और आगे बढ़ने लगे। इसके बाद स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसके बाद डाकबंगला चौराहे पर भी छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। हालांकि प्रदर्शनकारी पीछे हटने के बजाय और आक्रोशित हो गए। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच जमकर धक्का-मुक्की और पत्थरबाजी हुई, जिसमें कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हो गए।
घटना के बाद देर रात तक पुलिस कार्रवाई जारी रही। जानकारी के अनुसार, पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष सुशांत शेखर को देर रात करीब दो बजे पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उनकी गिरफ्तारी के बाद छात्र संगठनों ने आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया है।
प्रदर्शन के दौरान घायल होने वाले अधिकारियों और पुलिसकर्मियों में आईजी जितेंद्र राणा, टाउन डीएसपी-2 कामाख्या नारायण, गांधी मैदान थानाध्यक्ष अखिलेश मिश्रा, पत्रकार नगर थानाध्यक्ष सोनू कुमार, दारोगा चंदन राज, एएसआई संजीव कुमार सिंह, एएसआई रितेश कुमार, एएसआई अरविंद कुमार निराला, कांस्टेबल सूरज कुमार सिंह, पीएसआई अभिषेक रंजन, कांस्टेबल पूजा कुमारी, कांस्टेबल दुर्गा कुमारी सहित पुलिस लाइन और कोतवाली थाना के कई अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं।
पटना में हुए बवाल के बाद राज्यभर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। वहीं छात्र संगठन गुरुवार से गांधी मैदान में अनिश्चितकालीन धरना देकर अपनी मांगों पर अड़े रहने की बात कह रहे हैं।