78वें स्थापना दिवस पर झलकी आरडीएस कॉलेज की समृद्ध विरासत, मेधावियों का हुआ सम्मान

  • Post By Admin on Jul 19 2026
78वें स्थापना दिवस पर झलकी आरडीएस कॉलेज की समृद्ध विरासत, मेधावियों का हुआ सम्मान

मुजफ्फरपुर : रामदयालु सिंह महाविद्यालय के 78वें स्थापना दिवस के अवसर पर रविवार को भव्य सांस्कृतिक एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में रंगारंग प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया, वहीं मेधावी छात्र-छात्राओं, नेट-जेआरएफ में सफल विद्यार्थियों और सांस्कृतिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कॉलेज की ऐतिहासिक पत्रिका ‘वर्तिका’ तथा डॉ. कृतिका वर्मा द्वारा लिखित पुस्तक ‘कंज्यूमर बिहेवियर’ का भी लोकार्पण किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ कुलगीत से हुआ, जिसमें खुशी, शिवानी, प्रणव और शाश्वत ने प्रस्तुति दी। इसके बाद गणेश वंदना में पियूष, कोमल, रिया, साक्षी, पलक और पायल ने मनमोहक प्रस्तुति दी। ऋतंभरा के एकल नृत्य 'मोहे पनघट पर नंदलाल छेड़ गयो रे' और लोकगीत 'आज मिथिला नगरिया निहाल सखिया' की समूह प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अपूर्व ने 'रहे ना रहे हम' गीत प्रस्तुत किया, जबकि कृष्ण-राधा समूह नृत्य में पियूष, ऋतंभरा, सलोनी, कोमल, रिया, अपूर्वा, रिद्धि, साक्षी, पलक, पायल, अनिशा और अंजलि ने अपनी शानदार प्रस्तुति से खूब तालियां बटोरीं। सांस्कृतिक कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सभी प्रतिभागियों के साथ विरासत टीम के डॉ. आरती, डॉ. प्रियंका दीक्षित, डॉ. कृतिका वर्मा, डॉ. स्नेह लता, डॉ. सुमन लता, डॉ. हसन रजा एवं कुमारी निधि को प्राचार्य ने सम्मानित किया। साथ ही विभिन्न विभागों के टॉपर तथा नेट एवं जेआरएफ में सफल छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित किया गया।

समारोह का उद्घाटन करते हुए बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय ने कहा कि रामदयालु सिंह महाविद्यालय का इतिहास गौरवशाली रहा है। इस संस्थान ने राजनीति, समाज सेवा, विज्ञान और साहित्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में देश को अनेक प्रतिभाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि समर्पित शिक्षक, ऊर्जावान विद्यार्थी और कर्मठ कर्मचारी ही किसी संस्थान की वास्तविक ताकत होते हैं तथा कठिन परिश्रम और दृढ़ इच्छाशक्ति सफलता की कुंजी है। पूर्व कुलपति प्रो. रिपूसूदन श्रीवास्तव ने अपने छात्र जीवन और शिक्षक के रूप में बिताए अनुभव साझा करते हुए कहा कि शिक्षक और छात्र का रिश्ता विश्वास और संस्कार का रिश्ता होता है। उन्होंने महाविद्यालय की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और मिनर्वा क्लब जैसी संस्थाओं की भूमिका को याद करते हुए कॉलेज के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

प्राचार्य डॉ. शशि भूषण कुमार ने अतिथियों का अंगवस्त्र एवं कॉलेज पत्रिका भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने महाविद्यालय के चहुंमुखी विकास की उपलब्धियों और भावी योजनाओं का रोडमैप प्रस्तुत करते हुए कहा कि शिक्षकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास से कॉलेज लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. रमेश प्रसाद गुप्ता ने महाविद्यालय के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला, जबकि पूर्व प्राचार्य डॉ. बी.के. आजाद ने अपने अनुभव साझा किए।

समारोह में पूर्व प्राचार्य, सेवानिवृत्त शिक्षक, विश्वविद्यालय के पदाधिकारी, विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने 78वें स्थापना दिवस समारोह को यादगार बना दिया।