प्रांतीय प्रधानाचार्य सम्मेलन में गूंजा संकल्प : सेवा और संस्कार से सशक्त होगा राष्ट्र
- Post By Admin on Feb 12 2026
मुजफ्फरपुर : प्रांतीय प्रधानाचार्य सम्मेलन के द्वितीय दिवस का शुभारंभ गुरुवार को प्रथम सत्र के साथ विधिवत पूजा-अर्चना द्वारा किया गया। इस अवसर पर क्षेत्रीय मंत्री श्री राम अवतार नारसरिया, लोक शिक्षा समिति मुजफ्फरपुर के प्रदेश सचिव श्री रामलाल सिंह, अखिल भारतीय मंत्री श्री ब्रह्मा जी राव, क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री ख्याली राम तथा सप्तशक्ति संगम की क्षेत्रीय संयोजिका डॉ. पूजा सहित अनेक पदाधिकारी मंचासीन रहे। प्रदेश के विभिन्न जिलों से पधारे प्रधानाचार्यों की गरिमामयी उपस्थिति से सम्मेलन का वातावरण अत्यंत प्रेरणादायी बना रहा। कार्यक्रम का संचालन करते हुए उद्घोषक श्री अनिल कुमार राम ने अतिथियों का परिचय प्रस्तुत किया।
प्रथम सत्र में श्री राम अवतार नारसरिया ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, अनुशासन और जवाबदेही को अत्यंत आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि वाणिज्य विषय विद्यालयी प्रबंधन का सुदृढ़ आधार है, जिससे कार्यप्रणाली व्यवस्थित होती है और प्रधानाचार्यों की नेतृत्व क्षमता मजबूत बनती है। इसके पश्चात प्रदेश सचिव श्री रामलाल सिंह ने सम्मेलन की रूपरेखा एवं आगामी कार्ययोजनाओं पर प्रकाश डालते हुए शैक्षणिक गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए सभी प्रधानाचार्यों से सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
द्वितीय सत्र में क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री ख्याली राम ने “विद्या भारती का लक्ष्य” विषय पर प्रेरक उद्बोधन दिया। उन्होंने सेवा, संस्कार, समर्पण, स्वामित्व और स्वामी भाव जैसे मूल मूल्यों की व्याख्या करते हुए कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण का सबसे सशक्त माध्यम है। जब विद्यालय इन मूल्यों को आत्मसात करेंगे, तभी समाज में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन संभव होगा।
सप्तशक्ति संगम की क्षेत्रीय संयोजिका डॉ. पूजा ने संगठन के उद्देश्यों और शिक्षा क्षेत्र में उसकी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए प्रधानाचार्यों से इन मूल्यों को विद्यालयी जीवन में व्यवहारिक रूप से लागू करने का आग्रह किया। वहीं विशेष अतिथि किसान चाची श्रीमती राजकुमारी देवी ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन की प्रेरक कथा साझा करते हुए शिक्षा, आत्मविश्वास और परिश्रम की शक्ति को रेखांकित किया।
अंतिम सत्रों में प्रधानाचार्यों द्वारा प्रस्तुत कार्ययोजनाओं, संरचनात्मक सुधारों और समयबद्ध क्रियान्वयन पर गहन चर्चा की गई। विभाग-स्तरीय बैठकों के साथ द्वितीय दिवस के सभी सत्रों का सफलतापूर्वक समापन हुआ। सम्मेलन का संपूर्ण वातावरण शैक्षणिक चिंतन, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण के संकल्प से परिपूर्ण नजर आया।