ललित नारायण तिरहुत कॉलेज बनेगा नवगीत का राष्ट्रीय मंच, तीन सत्रों में होगा विमर्श और काव्य प्रस्तुति
- Post By Admin on Feb 12 2026
मुजफ्फरपुर: साहित्यिक परिदृश्य में मुजफ्फरपुर एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर के आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। 12 मार्च 2026 को ललित नारायण तिरहुत कॉलेज परिसर में राष्ट्रीय नवगीत सम्मेलन आयोजित होगा, जिसमें देशभर के नामचीन नवगीतकारों की उपस्थिति प्रस्तावित है। सम्मेलन को लेकर आमगोला स्थित शुभानंदी में आयोजित प्रेसवार्ता में आयोजकों ने कार्यक्रम की रूपरेखा, उद्देश्य और तैयारियों की जानकारी साझा की।
ललित नारायण तिरहुत कॉलेज के हिंदी विभाग और नवगीत कुटुंब के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस सम्मेलन को साहित्यिक जगत के लिए महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। समारोह के संयोजक डॉ. संजय पंकज ने बताया कि अब तक देश के विभिन्न राज्यों से 35 नवगीतकारों ने सहभागिता की स्वीकृति प्रदान कर दी है। उनके अनुसार सम्मेलन को तीन सत्रों में विभाजित किया गया है, ताकि नवगीत की परंपरा, समकालीन स्वर और शिल्पगत पक्षों पर व्यापक विमर्श संभव हो सके। कार्यक्रम के पहले सत्र में पुस्तक लोकार्पण होगा। दूसरे सत्र में नवगीत की अवधारणा, विकास और वर्तमान संदर्भों पर चर्चा एवं विमर्श आयोजित किया जाएगा, जिसमें शोधार्थियों, अध्येताओं और रचनाकारों की सक्रिय भागीदारी अपेक्षित है। अंतिम सत्र में नवगीतों की प्रस्तुति के माध्यम से सृजनात्मक अभिव्यक्तियों का मंचन किया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि इस आयोजन से नवगीत और गीत विधा से जुड़े शोधार्थियों, विद्यार्थियों और जिज्ञासुओं को अकादमिक तथा रचनात्मक दृष्टि से विशेष लाभ मिलेगा।
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. ममता रानी ने जानकारी दी कि सम्मेलन के दौरान नवगीत अर्धशतक भाग 2 का लोकार्पण किया जाएगा, जिसका संपादन शिवानंद सिंह सहयोगी ने किया है। उन्होंने इसे हिंदी साहित्य के लिए सार्थक और उपयोगी प्रकाशन बताते हुए कहा कि इससे नवगीत के विविध आयामों से पाठक और रचनाकार अधिक व्यवस्थित ढंग से परिचित हो सकेंगे। प्रेसवार्ता में वक्ताओं ने नवगीत आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर भी प्रकाश डाला। बताया गया कि हिंदी काव्य आंदोलनों के इतिहास में नवगीत आंदोलन सबसे लंबे समय तक सक्रिय और प्रभावशाली रहा है। नवगीत के प्रवर्तक के रूप में मुजफ्फरपुर के कविवर राजेंद्र प्रसाद सिंह का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उन्होंने गीतांगिनी नामक संकलन का संपादन-प्रकाशन कर भूमिका में नवगीत शब्द का प्रयोग किया और इसकी प्रवृत्तियों को रेखांकित किया। डॉ. रंजीत पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर इस स्वरूप का आयोजन पहली बार मुजफ्फरपुर में हो रहा है, जो शहर के साहित्यिक गौरव को नई पहचान देगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नवगीत के नामकरण का श्रेय इसी शहर को प्राप्त है, इसलिए सम्मेलन का आयोजन यहां होना सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।
सम्मेलन में एक खुला सत्र भी रखा गया है, जिसमें प्रश्नोत्तर के माध्यम से प्रतिभागी नवगीत से जुड़े विचारों, शिल्प और चुनौतियों पर संवाद कर सकेंगे। आयोजकों के अनुसार यह सत्र विद्यार्थियों और युवा रचनाकारों के लिए विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होगा। राष्ट्रीय नवगीत सम्मेलन को लेकर साहित्य प्रेमियों और अकादमिक जगत में उत्साह का माहौल है। आयोजन से नवगीत विधा के प्रति नई पीढ़ी की रुचि बढ़ने और गंभीर साहित्यिक संवाद को बल मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।