रक्षक ही बने भक्षक : सरपंच की पिटाई पर पुलिस के खिलाफ मानवाधिकार आयोग में शिकायत
- Post By Admin on Feb 12 2026
मुजफ्फरपुर : जिले के पियर थाना क्षेत्र के बड़गांव पंचायत के सरपंच लालबाबू सहनी की कथित बेरहमी से पिटाई का मामला अब राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुँच गया है। पीड़ित सरपंच ने मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा के माध्यम से आयोग में दो अलग-अलग याचिकाएँ दायर कर पियर थाना की पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय कार्रवाई की माँग की है।
याचिका में सरपंच ने बताया है कि 6 फरवरी को पियर थाना के कुछ पुलिसकर्मी गांव के चौक पर कथित तौर पर अवैध वसूली कर रहे थे। इसकी जानकारी मिलने पर जब वे मौके पर पहुँचे और स्थिति जानने का प्रयास किया तो पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी और उन्हें नजरबंद कर लिया। आरोप है कि इसके बाद कई पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों ने उन्हें बेरहमी से पीटा, जिससे उनका हाथ-पैर टूट गया।
पीड़ित ने पियर थाना के पुलिस पदाधिकारी रजनीकांत सहित अखिलेश कुमार, कमलेश्वर नाथ मिश्रा, धर्मेंद्र त्यागी, कुंदन कुमार, प्रिंस कुमार समेत एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों पर गंभीर मारपीट का आरोप लगाया है। सरपंच का कहना है कि उन्हें बचाने आई उनकी भाभी के साथ भी मारपीट की गई, जिससे उनका हाथ टूट गया। इसके अलावा महिलाओं और बच्चों के साथ भी कथित तौर पर बर्बरता की गई।
घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायल सरपंच को एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज हुआ। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस ने ग्रामीणों को डराने के लिए तीन-चार राउंड फायरिंग भी की।
सरपंच का कहना है कि घटना के बाद पियर थाना की पुलिस ने उल्टे उनके सहित कई निर्दोष ग्रामीणों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि थाना क्षेत्र में पुलिस द्वारा नियमित रूप से अवैध वसूली की जाती है और झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देकर लोगों से मोटी रकम की उगाही की जाती है, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
मामले की पैरवी कर रहे मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा ने इसे मानवाधिकार का घोर उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह घटना पुलिस तंत्र और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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