परीक्षा पे चर्चा : पीएम मोदी ने दिया जीवन का मंत्र, बोले—अतीत नहीं, भविष्य पर रखें फोकस

  • Post By Admin on Feb 06 2026
परीक्षा पे चर्चा : पीएम मोदी ने दिया जीवन का मंत्र, बोले—अतीत नहीं, भविष्य पर रखें फोकस

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के दौरान छात्रों से संवाद करते हुए न सिर्फ पढ़ाई और परीक्षा से जुड़े सवालों के जवाब दिए, बल्कि अपने 75वें जन्मदिन से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। पीएम मोदी ने कहा कि वह बीते हुए वर्षों की गिनती नहीं करते, बल्कि आगे बचे समय को जीने और उसका बेहतर उपयोग करने में विश्वास रखते हैं।

कार्यक्रम के दौरान मणिपुर की एक छात्रा ने प्रधानमंत्री की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह बचपन से ही उनकी प्रेरणा रही हैं और संयोग से उनका जन्मदिन भी पीएम मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर को ही आता है। इस पर प्रधानमंत्री ने मुस्कराते हुए एक घटना साझा की। उन्होंने बताया कि हाल ही में उनके एक परिचित नेता ने फोन कर कहा कि आपके 75 साल पूरे हो गए हैं, तो उन्होंने जवाब दिया—“25 साल अभी बाकी हैं, मैं जो गुजर गया है उसे नहीं, बल्कि जो बचा है उसकी गिनती करता हूं।”

प्रधानमंत्री ने छात्रों को जीवन का मंत्र देते हुए कहा कि अतीत पर ज्यादा सोचकर समय बर्बाद करने के बजाय भविष्य को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो बीत गया है, वह सीख है, लेकिन असली ताकत इस बात में है कि आगे के समय को कैसे सार्थक बनाया जाए।

कार्यक्रम में एक छात्रा ने परीक्षा की रणनीति को लेकर सवाल किया कि क्या पिछले वर्षों के प्रश्नों को देखकर कुछ टॉपिक छोड़ देना सही होता है। इस पर पीएम मोदी ने कहा कि सवाल कभी भी सिलेबस से बाहर नहीं आते, लेकिन केवल ‘श्योर सजेशन’ और पुराने प्रश्नों पर निर्भर रहना एक तरह की बीमारी है। उन्होंने इसे छात्रों के साथ-साथ कुछ शिक्षकों की भी मानसिकता बताया, जो सिर्फ अच्छे नंबरों पर फोकस करते हैं।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि अच्छे शिक्षक वही होते हैं, जो पूरे सिलेबस को गहराई से पढ़ाते हैं और छात्रों को उसकी अहमियत समझाते हैं। उन्होंने परीक्षा को जीवन का अंतिम लक्ष्य मानने से भी इनकार किया और कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नंबर लाना नहीं, बल्कि जीवन का समग्र विकास होना चाहिए।

पीएम मोदी ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे एक खिलाड़ी को अपने पूरे शरीर और कौशल पर ध्यान देना पड़ता है, वैसे ही छात्रों को भी जीवन निर्माण के लिए शिक्षा को माध्यम बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा आत्ममूल्यांकन का एक जरिया है, लेकिन जीवन की सफलता का पैमाना केवल अंकों से तय नहीं होता।