बिहार के टेंडर घोटाले में बड़ा एक्शन, ठेकेदार रिशु श्री गिरफ्तार
- Post By Admin on May 28 2026
पटना : बिहार में सरकारी ठेकों में कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सरकार की विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ठेकेदार रिशु श्री को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद उसे देर रात एसवीयू कार्यालय ले जाया गया, जहां लंबी पूछताछ की गई। अब उसे न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेजने की कार्रवाई की जा रही है।
एसवीयू की छापेमारी के दौरान एजेंसी को 61 सेल डीड के दस्तावेज, करीब सवा किलो सोना, चांदी और हीरे के आभूषण के साथ लगभग ढाई लाख रुपए नकद बरामद हुए हैं। बरामद जेवरात की अनुमानित कीमत करीब दो करोड़ रुपए बताई जा रही है। एजेंसी अब आरोपी की अन्य संपत्तियों और निवेश की भी जांच कर रही है। सरकार ने इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी “जीरो टॉलरेंस” नीति का हिस्सा बताया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सरकारी निविदाओं में किस प्रकार हेराफेरी की गई और किन अधिकारियों तथा कंपनियों को इसका लाभ पहुंचाया गया। सूत्रों के अनुसार, रिशु श्री के कई बड़े अधिकारियों और आईएएस अफसरों से करीबी संबंध होने की बात भी जांच में सामने आई है।
बताया गया कि एसवीयू ने 30 अप्रैल 2025 को रिशु श्री के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। इस केस में बिहार कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि सरकारी टेंडरों में हेरफेर कर कुछ खास कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। इससे पहले नवंबर 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी रिशु श्री के ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस दौरान 51 लाख रुपए नकद, करोड़ों रुपए के सोने-चांदी के आभूषण और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए थे। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रिशु श्री और आईएएस संजीव हंस को आरोपी बनाया था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, रिशु श्री ने कथित तौर पर अपने प्रभाव और अधिकारियों से संबंधों का इस्तेमाल कर जल संसाधन, नगर विकास और भवन निर्माण विभागों में बड़े ठेके हासिल किए। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ अधिकारियों को कमीशन देने, निजी खर्च उठाने और विदेश यात्राएं प्रायोजित करने जैसे आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है। फिलहाल एसवीयू की टीम जब्त दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और बैंक लेन-देन की गहन जांच में जुटी है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि सरकारी योजनाओं में कितनी राशि का घोटाला हुआ और इसमें किन-किन लोगों की संलिप्तता रही। इस कार्रवाई के बाद बिहार में सरकारी टेंडर प्रक्रिया और ठेका व्यवस्था को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।