पंचपदी शिक्षण से डिजिटल शिक्षा तक, प्रशिक्षण वर्ग में शिक्षकों को मिला व्यवहारिक मार्गदर्शन

  • Post By Admin on Jul 12 2026
पंचपदी शिक्षण से डिजिटल शिक्षा तक, प्रशिक्षण वर्ग में शिक्षकों को मिला व्यवहारिक मार्गदर्शन

मुजफ्फरपुर : विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान एवं विद्या भारती बिहार के संयुक्त तत्वावधान में भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, सदातपुर के विवेकानंद सभागार में आयोजित क्षेत्रीय आचार्य स्थायित्व प्रशिक्षण वर्ग के चौथे दिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, पंचपदी शिक्षण पद्धति, बहुभाषिक शिक्षा और आधुनिक शैक्षिक तकनीक पर केंद्रित चार शैक्षणिक सत्र आयोजित किए गए। 9 से 15 जुलाई तक चलने वाले इस प्रशिक्षण वर्ग में विभिन्न शिक्षक-प्रशिक्षण महाविद्यालयों के आचार्य सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।

प्रथम एवं द्वितीय सत्र के मुख्य वक्ता शिक्षाविद् धारणीकांत पांडे रहे। उन्होंने "राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा पंचपदी शिक्षण पद्धति आधारित पाठ योजना" विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को ज्ञान देना नहीं, बल्कि उनके समग्र व्यक्तित्व का विकास करना है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित पंचपदी शिक्षण पद्धति को इस लक्ष्य की प्राप्ति का प्रभावी माध्यम बताते हुए पाठ योजना निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया को व्यावहारिक उदाहरणों के साथ समझाया। उन्होंने कहा कि यह पद्धति शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक सहभागितापूर्ण, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाती है।

द्वितीय सत्र में प्रतिभागी प्राध्यापकों ने समूहों में पंचपदी आधारित पाठ योजनाएं तैयार कर सूक्ष्म शिक्षण (माइक्रो टीचिंग) के माध्यम से उनका व्यवहारिक प्रदर्शन किया। धारणीकांत पांडे ने प्रस्तुतियों का विश्लेषण करते हुए शिक्षण कौशल, कक्षा प्रबंधन और प्रभावी अध्यापन की बारीकियों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।

तृतीय सत्र में नालंदा केंद्रीय विश्वविद्यालय के शिक्षाविद् डॉ. राजेश्वर कुमार ने पूर्व निर्धारित दायित्वों के कारण ऑनलाइन माध्यम से "महाविद्यालयीय शिक्षा में भाषाओं का समन्वय एवं भाषा नीति" विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 बहुभाषिक शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। मातृभाषा एवं भारतीय भाषाओं के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, ज्ञान और राष्ट्रीय अस्मिता की वाहक भी है।

चतुर्थ एवं अंतिम सत्र में डॉ. भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के प्रो. सुभाष मिश्र ने "शैक्षिक तकनीक (MOOCs, SWAYAM आदि)" विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, पहुंच और नवाचार को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों से SWAYAM, MOOCs और अन्य डिजिटल संसाधनों का प्रभावी उपयोग कर शिक्षण को अधिक नवाचारी, छात्र-केंद्रित और सहभागितापूर्ण बनाने का आह्वान किया।

दिनभर चले चारों सत्रों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, भारतीय ज्ञान परंपरा, पंचपदी शिक्षण पद्धति, बहुभाषिक शिक्षा और डिजिटल शिक्षण के विभिन्न पहलुओं पर गंभीर विमर्श हुआ। प्रतिभागियों ने इसे अपने शिक्षण जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उनकी पाठ योजना निर्माण क्षमता, शिक्षण कौशल, कक्षा संचालन दक्षता और तकनीकी समझ में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। प्रशिक्षण वर्ग के सभी सत्रों का संचालन भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, सदातपुर के प्राचार्य डॉ. राकेश कुमार पाल ने किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत "वंदे मातरम् के सामूहिक गायन तथा अगले दिन के सत्रों की रूपरेखा की जानकारी के साथ हुआ।