बिहार की स्टेट हाईवे के सफ़र का देना होगा दाम ! बिहार की नई टोल नीति से आम लोगों की जेब पर बढ़ेगा बोझ

  • Post By Admin on Jul 05 2026
बिहार की स्टेट हाईवे के सफ़र का देना होगा दाम ! बिहार की नई टोल नीति से आम लोगों की जेब पर बढ़ेगा बोझ

पटना: बिहार सरकार की नई टोल पॉलिसी को आम जनता के लिए राहत नहीं, बल्कि आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला कदम बताया जा रहा है। सरकार भले ही स्थानीय लोगों के लिए 250 रुपये का मासिक पास और पूरे राज्य के लिए 2500 रुपये का पास सुविधा बता रही हो, लेकिन सवाल यह है कि जिस सड़क का निर्माण जनता के टैक्स के पैसे से हुआ, उस पर चलने के लिए लोगों से बार-बार शुल्क क्यों लिया जाए?

नई नीति के तहत जिन मोटरसाईकिल चालकों को अब तक राहत मिलती थी, उन्हें भी कई परिस्थितियों में आने वाले समय में टोल देना पड़ेगा? यदि सड़क का कोई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा तो बाईक सवारों से भी टोल वसूला जाएगा। यानी रोजमर्रा की नौकरी, पढ़ाई और छोटे कारोबार के लिए आने-जाने वाले लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

स्थानीय लोगों को 20 किलोमीटर के दायरे में 250 रुपये का मासिक पास लेने की सुविधा दी गई है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि पहले जहां कोई शुल्क नहीं देना पड़ता था, अब वहां भी मासिक भुगतान करना होगा। यानी राहत के नाम पर एक नई वसूली व्यवस्था बनाई जा रही है। पूरे बिहार में यात्रा करने वालों के लिए 2500 रुपये का मासिक पास भी हर किसी के लिए व्यावहारिक नहीं है। छोटे व्यापारियों, टैक्सी चालकों और आम यात्रियों के लिए यह अतिरिक्त खर्च उनकी आय पर असर डाल सकता है।

नीति में कृषि उपयोग वाले ट्रैक्टरों को छूट दी गई है, लेकिन अन्य व्यावसायिक और निजी वाहन मालिकों को लगातार टोल देना होगा। दूसरी ओर, वीआईपी, विधायक, विधान पार्षद और महाधिवक्ता जैसे पदाधिकारियों को टोल से छूट मिलने पर भी सवाल उठ रहे हैं। आम जनता का तर्क है कि सबसे अधिक सुविधा उन्हीं लोगों को मिल रही है जो पहले से सरकारी संसाधनों का लाभ उठाते हैं, जबकि भुगतान का बोझ आम नागरिकों पर डाला जा रहा है।

विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि सरकार को नई टोल व्यवस्था लागू करने से पहले व्यापक जनसुनवाई करनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि यह नीति आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने वाली है और इससे रोजाना सफर करने वाले लाखों लोगों का खर्च बढ़ेगा।