बाल रंगमंच और लोक नाट्य के संगम ने जीता ग्रामीणों का दिल, तीन दिवसीय कार्यशाला संपन्न

  • Post By Admin on Jul 12 2026
बाल रंगमंच और लोक नाट्य के संगम ने जीता ग्रामीणों का दिल, तीन दिवसीय कार्यशाला संपन्न

मुजफ्फरपुर: देशज रंग मण्डप, भोपाल द्वारा आयोजित तीन दिवसीय लोक नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन मुजफ्फरपुर जिले के बोचहां, मुशहरी और कांटी प्रखंड के विभिन्न गांवों में हुआ। कार्यशाला में बाल रंगमंच और लोक नाट्य का समन्वय देखने को मिला, जिसने बच्चों, अभिभावकों और ग्रामीणों का भरपूर ध्यान आकर्षित किया।

कार्यशाला के दौरान बच्चों को रंगमंच की बारीकियों, लोक नाट्य की परंपराओं तथा शिक्षा में बाल रंगमंच की भूमिका से व्यावहारिक रूप से परिचित कराया गया। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद बच्चों ने सामाजिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित नाटकों की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। प्रस्तुतियों को ग्रामीणों ने खूब सराहा और बच्चों का उत्साहवर्धन किया।

संस्था की अध्यक्ष प्रियंका सिन्हा ने समापन अवसर पर बच्चों को पुस्तक और कलम भेंट कर उन्हें अपनी संस्कृति, लोक परंपराओं और रंगमंचीय विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बच्चों में सृजनात्मकता, आत्मविश्वास और सामाजिक चेतना विकसित करने में रंगमंच की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कार्यशाला में प्रशिक्षक पायल सिन्हा, अभिजीत गाडेकर और दीपक कुमार ने बच्चों को अभिनय, लोक रंगमंच, अभिव्यक्ति, संवाद कला, मंच संचालन तथा शिक्षा में बाल रंगमंच के विभिन्न आयामों का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान खेल-आधारित गतिविधियों और अभिनय अभ्यास के माध्यम से बच्चों की रचनात्मक क्षमता को विकसित करने पर विशेष बल दिया गया।

आयोजकों ने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों की छिपी प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना, उनमें आत्मविश्वास का संचार करना तथा लोक संस्कृति और रंगमंच के प्रति रुचि विकसित करना है। उन्होंने भविष्य में भी ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार की सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कार्यशालाओं का नियमित आयोजन करने की प्रतिबद्धता जताई। ग्रामीणों और अभिभावकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि गांवों में ऐसे सांस्कृतिक आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उनका मानना है कि इस तरह की गतिविधियां बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनती हैं।