पश्चिमी दृष्टिकोण में श्री रामकृष्ण के व्यक्तित्व और कृतित्व पर परिचर्चा, वक्ताओं ने रेखांकित किया वैश्विक प्रभाव
- Post By Admin on Sep 20 2026
मुजफ्फरपुर : रामकृष्ण मिशन सेवा आश्रम, बेला, मुजफ्फरपुर के विवेकानंद स्टडी सर्किल के तत्वावधान में “पश्चिमी दृष्टिकोण में श्री रामकृष्ण: प्रारंभिक एवं आधुनिक लेखकों के विचार” विषय पर एक विशेष वेबिनार का आयोजन किया गया। इस वेबिनार का मुख्य उद्देश्य श्री रामकृष्ण परमहंस के व्यक्तित्व, कृतित्व, आध्यात्मिक चिंतन एवं जीवन-दर्शन को पाश्चात्य दृष्टिकोण से समझना था।
वेबिनार के मुख्य वक्ता, बिहार होमगार्ड के पूर्व कमांडिंग ऑफिसर श्री विमल कुमार शांडिल्य ने श्री रामकृष्ण परमहंस के व्यक्तित्व एवं आध्यात्मिक चिंतन पर पश्चिमी विचारकों के दृष्टिकोण को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने विशेष रूप से प्रसिद्ध जर्मन विद्वान मैक्स मूलर, फ्रांसीसी साहित्यकार एवं विचारक रोमा रोला (Romain Rolland), फ्रांसीसी विचारक क्रिस्टोफर तथा अन्य पाश्चात्य एवं पूर्वी चिंतकों के लेखन और विचारों का उल्लेख करते हुए बताया कि श्री रामकृष्ण का आध्यात्मिक व्यक्तित्व केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पश्चिमी विद्वानों और चिंतकों को भी गहराई से प्रभावित करता रहा है। श्री शांडिल्य ने आगे कहा कि मैक्स मूलर जैसे विद्वानों ने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और श्री रामकृष्ण के जीवन को समझने का गंभीर प्रयास किया, वहीं रोमा रोला ने श्री रामकृष्ण के जीवन और साधना में निहित सार्वभौमिक आध्यात्मिक संदेश को विशेष महत्व दिया। उन्होंने पाश्चात्य एवं पूर्वी विचार परंपराओं के विभिन्न लेखकों के विचारों की तुलना करते हुए श्री रामकृष्ण के संदेश की व्यापकता और प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
सत्र के दौरान प्रो. राजेश कुमार सिंह, प्रो. अमरेंद्र ठाकुर एवं डॉ. ललित किशोर ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इन वक्ताओं ने श्री रामकृष्ण के जीवन-दर्शन, उनकी साधना, सर्वधर्म समभाव की भावना तथा मानवता के प्रति उनके दृष्टिकोण पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की उस उदात्त भावना का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक मार्गों के बीच समन्वय और सह-अस्तित्व का संदेश मिलता है।नइस अवसर पर श्री हरि नारायण पांडे, श्री देवेंद्र पांडे, श्री मुक्तेश्वर सिंह, श्री विजय कुमार प्रसाद, प्रो. पूनम सिंह, श्री सीमा सरकार, श्री नवीन कुमार झा, श्री राजीव मिश्रा, श्री अरुणेंद्र नाथ राय, सुश्री माही, स्वामी अभयापदानंद सहित रामकृष्ण मिशन सेवा आश्रम से जुड़े अनेक लोग एवं शिक्षाविद उपस्थित रहे।
रामकृष्ण मिशन सेवा आश्रम के सचिव स्वामी भावात्मानंद ने वेबिनार में भाग लेने वाले सभी विद्वानों एवं प्रतिभागियों को अपना आशीर्वचन प्रदान किया। उन्होंने श्री रामकृष्ण के जीवन एवं संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा भारतीय आध्यात्मिक चिंतन को व्यापक स्तर पर समझने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. श्री नारायण प्रसाद ने अत्यंत प्रभावशाली ढंग से किया। उन्होंने विषय की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए अतिथियों एवं वक्ताओं का स्वागत किया तथा वेबिनार की चर्चा को क्रमबद्ध रूप से आगे बढ़ाया। कार्यक्रम के अंत में श्री नवीन कुमार झा ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए मुख्य वक्ता, सभी वक्ताओं, रामकृष्ण मिशन सेवा आश्रम के पदाधिकारियों एवं वेबिनार में शामिल सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
वेबिनार के माध्यम से यह संदेश उभरकर सामने आया कि श्री रामकृष्ण का जीवन और उनका आध्यात्मिक चिंतन किसी एक देश, धर्म या संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें मानवता के लिए व्यापक और सार्वभौमिक संदेश निहित है। पश्चिमी लेखकों और विचारकों द्वारा श्री रामकृष्ण के जीवन पर किए गए अध्ययन इस बात का प्रमाण हैं कि भारतीय आध्यात्मिक चिंतन ने विश्व के बौद्धिक एवं आध्यात्मिक विमर्श को भी गहराई से प्रभावित किया है।