बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी हुईं डॉ. ममता रानी, मुख्यमंत्री राहत कोष में दिया एक दिन का वेतन
- Post By Admin on Sep 19 2026
मुजफ्फरपुर : बिहार में बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए एलएनटी कॉलेज की प्राचार्या डॉ. ममता रानी ने संवेदनशील पहल करते हुए अपनी एक दिन की सैलरी मुख्यमंत्री राहत कोष में देने का निर्णय लिया है। उन्होंने अपनी एक दिन की सैलरी का चेक मुजफ्फरपुर भाजपा जिलाध्यक्ष विवेक कुमार को सौंपा। प्राचार्या की इस पहल को आपदा की घड़ी में मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
शैक्षणिक संस्थान की जिम्मेदारी संभालने के साथ सामाजिक सरोकारों को महत्व देने वाली डॉ. ममता रानी ने इस अवसर पर कहा कि बाढ़ से प्रभावित परिवार इस समय बेहद कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। ऐसे समय में उनके साथ खड़ा होना केवल प्रशासन या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर सक्षम व्यक्ति का दायित्व है। उन्होंने कहा कि अपनी ओर से दिया गया यह सहयोग भले ही छोटा हो, लेकिन इसका उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों तक राहत पहुंचाने के सामूहिक प्रयास में योगदान देना है।
डॉ. ममता रानी ने कहा कि आपदा के समय संवेदनशीलता और सहयोग की भावना ही समाज को मजबूती देती है। उन्होंने आम लोगों से भी अपील की कि वे अपनी क्षमता के अनुसार बाढ़ प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए आगे आएं और मुख्यमंत्री राहत कोष अथवा अन्य विश्वसनीय माध्यमों से सहयोग करें। उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा में सबसे अधिक जरूरत उन लोगों को होती है, जो अपने संसाधनों और सामान्य जीवन से अचानक वंचित हो जाते हैं। ऐसे परिवारों की मदद के लिए छोटी-छोटी पहल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने सामूहिक सहयोग को राहत कार्यों को मजबूत करने का माध्यम बताया।
डॉ. ममता रानी की इस पहल में एक प्राचार्या के रूप में उनकी सामाजिक जिम्मेदारी के साथ मानवीय दृष्टिकोण भी सामने आया। उनका कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को ज्ञान देना नहीं, बल्कि उनमें संवेदना, सहयोग और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। बाढ़ जैसे संकट के समय जरूरतमंद लोगों के साथ खड़ा होना इसी मानवीय सोच का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में एक-दूसरे की मदद करना ही सच्ची मानवता है। यदि समाज के सक्षम लोग अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करें, तो बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के प्रयासों को और मजबूती मिल सकती है।