बिहार के 3 हजार अतिथि प्राध्यापकों को बड़ी राहत, सेवा नियमितीकरण की जगी उम्मीद

  • Post By Admin on Aug 26 2026
बिहार के 3 हजार अतिथि प्राध्यापकों को बड़ी राहत, सेवा नियमितीकरण की जगी उम्मीद

पटना : बिहार के करीब 3 हजार अतिथि प्राध्यापकों के लिए लंबे समय से चल रहे आंदोलन के बीच राहत की खबर सामने आई है। 24 अगस्त की शाम पटना स्थित बिहार लोक भवन में पीएचडी होल्डर संगठन और अतिथि प्राध्यापकों के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई वार्ता के बाद लिखित सहमति बनी है। इसके बाद अतिथि प्राध्यापकों की सेवा को सुरक्षित करने और नियमितीकरण की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता खुला है।

लिखित समझौते के अनुसार अतिथि प्राध्यापकों से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की जाएगी। समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देने की बात कही गई है। सेवा में बने रहने के प्रस्ताव के तहत संबंधित शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जाएगी। इसके बाद उन्हें 65 वर्ष की उम्र तक सेवा में बनाए रखने पर विचार किया जाएगा। साथ ही न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ता देने के मुद्दे पर भी विचार किया जाना है।

करीब 20 दिनों से चल रहा था आमरण अनशन

अतिथि प्राध्यापकों के सेवा नियमितीकरण और सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली 2026 में बदलाव की मांग को लेकर गर्दनीबाग में करीब 20 दिनों से आंदोलन चल रहा था। पीएचडी होल्डर एसोसिएशन के बैनर तले कुमुद पटेल आमरण अनशन पर बैठे थे। लगातार अनशन के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने लगी थी। इसके बाद राजभवन और बिहार सरकार की ओर से मामले का संज्ञान लिया गया और प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया गया।

प्रतिनिधिमंडल में अतिथि प्राध्यापक डॉ. कुंदन सिंह, डॉ. विभा रानी, मोनू कुमार राय, डॉ. उमेश कुमार, आशीष कुमार और शिक्षक प्रतिनिधि एमएलसी जीवन कुमार शामिल रहे। करीब दो घंटे चली बातचीत के बाद लिखित समझौते पर सहमति बनी। इसके बाद अनशन समाप्त करने की घोषणा की गई। साथ ही 25 अगस्त को प्रस्तावित पैदल मार्च को भी स्थगित कर दिया गया।

उच्च शिक्षा सचिव के साथ भी हुई अहम वार्ता

इसी दौरान बिहार राज्य विश्वविद्यालय अतिथि सहायक प्राध्यापक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने उच्च शिक्षा सचिव राजीव रोशन के साथ भी करीब दो घंटे तक बातचीत की। संघ के अनुसार वार्ता में अतिथि प्राध्यापकों की सेवा नियमितीकरण को मुख्य मुद्दे के तौर पर रखा गया। वार्ता के बाद इसकी रिपोर्ट राजभवन भेजी गई।

इस बैठक में बिहार विश्वविद्यालय अतिथि प्राध्यापक संघ के अध्यक्ष डॉ. ललित किशोर, बीएनएमयू के अध्यक्ष डॉ. सतीश कुमार दास, मिथिला विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. बच्चा कुमार रजक, संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा के अध्यक्ष डॉ. मुकेश प्रसाद निराला, मगध विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. आशुतोष कुमार, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. संत कुमार और डॉ. सुमन पोद्दार मौजूद रहे।

2018 से सेवा दे रहे अतिथि प्राध्यापकों को उम्मीद

राज्य के विश्वविद्यालयों में वर्ष 2018 से संविदा के आधार पर काम कर रहे अतिथि प्राध्यापकों के लिए यह सहमति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दस्तावेजों की जांच के बाद 65 वर्ष तक सेवा जारी रखने, न्यूनतम वेतनमान और डीए जैसे मुद्दों पर विचार होने से शिक्षकों को अपनी सेवा और भविष्य को लेकर नई उम्मीद मिली है।

बिहार विश्वविद्यालय अतिथि प्राध्यापक संघ के अध्यक्ष डॉ. ललित किशोर ने समझौते का स्वागत करते हुए राजभवन और बिहार सरकार के प्रति आभार जताया। संघ ने वार्ता में शामिल दोनों प्रतिनिधिमंडलों के प्रयासों की भी सराहना की है। हालांकि अंतिम निर्णय समिति की समीक्षा और उसके बाद होने वाली प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।