जेपी जयंती पर गूंजा संपूर्ण क्रांति का संदेश, लोकतंत्र और जनहित के लिए सक्रिय रहने की शपथ

  • Post By Admin on Oct 11 2026
जेपी जयंती पर गूंजा संपूर्ण क्रांति का संदेश, लोकतंत्र और जनहित के लिए सक्रिय रहने की शपथ

मुजफ्फरपुर : लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर रविवार, 11 अक्टूबर को छाता चौक स्थित उनकी प्रतिमा पर जेपी आंदोलन और संपूर्ण क्रांति धारा से जुड़े लोगों ने माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान लोकनायक के संघर्षपूर्ण जीवन, लोकतांत्रिक मूल्यों और संपूर्ण क्रांति के विचारों पर चर्चा की गई। उपस्थित लोगों ने जेपी के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा जनहित, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए सक्रिय रहने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता रमन कुमार ने की। वक्ताओं ने कहा कि जयप्रकाश नारायण भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में ऐसे जननेता के रूप में याद किए जाते हैं, जिन्होंने सत्ता और पद से ऊपर उठकर जनहित, नैतिकता और व्यवस्था में व्यापक बदलाव की वकालत की। वर्ष 1974 का छात्र-युवा आंदोलन केवल तत्कालीन व्यवस्था के विरोध तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य राजनीति, शिक्षा, समाज और प्रशासन में बुनियादी परिवर्तन लाना भी था।

वक्ताओं के अनुसार, जेपी ने युवाओं को अन्याय, भ्रष्टाचार और जनविरोधी व्यवस्था के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से संगठित होकर संघर्ष करने की प्रेरणा दी। उनके विचारों में जनता की भागीदारी, सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और शासन व्यवस्था की जवाबदेही को विशेष महत्व दिया गया था। अध्यक्षीय संबोधन में रमन कुमार ने कहा कि संपूर्ण क्रांति का मूल उद्देश्य समाज और व्यवस्था में बुनियादी बदलाव लाना था। जेपी की जयंती केवल प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने का अवसर नहीं, बल्कि लोकतंत्र में आम लोगों की भूमिका और जिम्मेदारियों पर विचार करने का भी दिन है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता की भागीदारी, सामाजिक न्याय, नैतिकता और जवाबदेही में निहित है। जेपी के सपनों को साकार करने के लिए निरंतर जनजागरण और जनहित के मुद्दों पर सक्रियता जरूरी है।

प्रो. सोनू सरकार ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती आत्ममंथन का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने अपना जीवन जनता की शक्ति, लोकतांत्रिक अधिकारों और व्यवस्था परिवर्तन के लिए समर्पित किया। लोकतंत्र को केवल चुनाव और सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं माना जा सकता। इसकी सार्थकता तभी है, जब समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज सुनी जाए, युवाओं को अपनी बात रखने का अवसर मिले और शासन व्यवस्था जनता के प्रति जवाबदेह बने।प्रो. सोनू सरकार ने आगे कहा कि जेपी आंदोलन की विरासत केवल इतिहास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी देती है। आंदोलन से जुड़े लोगों का दायित्व है कि वे जेपी के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं और लोकतंत्र, सामाजिक समानता, नागरिक स्वतंत्रता तथा जनभागीदारी के मुद्दों पर लोगों को जागरूक करें। उन्होंने कहा कि जेपी को सच्ची श्रद्धांजलि उनके विचारों को व्यवहार और सामाजिक जीवन में अपनाकर ही दी जा सकती है।

कार्यक्रम में शामिल जेपी आंदोलन से जुड़े साथियों ने भी लोकनायक के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संपूर्ण क्रांति का संदेश आज भी सामाजिक बदलाव की दिशा में प्रेरणा दे सकता है। इसके लिए जरूरी है कि युवा पीढ़ी जेपी के संघर्ष, त्याग और लोकतांत्रिक मूल्यों से परिचित हो तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में अपनी भूमिका निभाए। इस अवसर पर मोहन प्रसाद सिन्हा, अशोक भारती, प्रभात कुमार, राणा देवी दयाल, सुनील कुमार, अंशु कुमार सहित जेपी आंदोलन और संपूर्ण क्रांति धारा से जुड़े कई लोग मौजूद रहे। सभी ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, सामाजिक न्याय और जनहित के सवालों पर निरंतर सक्रिय रहने का संकल्प दोहराया।