प्रणय प्रणयन पर्व के रूप में मनाई गई साहित्यकार डॉ. शिवदास पांडेय की जयंती, गीत-कविता से गूंजा सुधांजलि परिसर
- Post By Admin on Feb 08 2026
मुजफ्फरपुर: हिंदी गीत-कविता के समर्थ, संवेदनशील और प्रेरक रचनाकार डॉ. शिवदास पांडेय की जयंती मिठनपुरा स्थित सुधांजलि में प्रणय प्रणयन पर्व के रूप में भावपूर्ण वातावरण में मनाई गई। साहित्यश्री डॉ. शिवदास पांडेय विचार मंच तथा कला साहित्य मंच के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में साहित्य, संस्कृति और सृजन की बहुरंगी छवियां उभरकर सामने आईं।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. शिवदास पांडेय के चित्र पर दीप प्रज्वलन, माल्यार्पण और पुष्पांजलि के साथ हुआ। इस अवसर पर उनके परनाती विहान वैवस्वत ने अतिथियों का स्वागत करते हुए आशीर्वाद लिया, जिससे समारोह में पारिवारिक आत्मीयता का भाव और गहरा हो गया। संगीतमय प्रस्तुतियों ने आयोजन को सुरमई बना दिया। सिद्धि शंकर मिश्र ने स्वागत गीत के साथ ‘मंगलयान चले, गान झरने लगे’ की प्रस्तुति दी। डॉ. राकेश कुमार मिश्र ने ‘तुम मेरे किसी दंश के जहर मीठे, तुम मेरे प्राण में पसर जाओ’ सुनाकर भावुक वातावरण रचा, जबकि डॉ. पुष्पा प्रसाद ने ‘मुझे दुनिया की सारी खुशी चाहिए’ सहित अन्य प्रेमगीतों से श्रोताओं को भावलोक में पहुंचा दिया। तबले पर हिमांचल की संगति ने प्रस्तुतियों को विशेष ऊंचाई दी।
स्वागत संबोधन में वंदना विजय लक्ष्मी ने कहा कि सुधांजलि परिवार डॉ. शिवदास पांडेय के स्नेह और रचनात्मक ऊर्जा से सदा अभिषिक्त रहा। यहां आने वाला हर रचनाकार उनका अपना हुआ करता था। उनके लोकज्ञान और आत्मीयता ने एक रचनात्मक परिवार का निर्माण किया, जिसमें सभी सहभागी समान भाव से जुड़े। अध्यक्षीय उद्गार में चितरंजन सिन्हा कनक ने कहा कि डॉ. शिवदास पांडेय सरल, सहज हृदय के बड़े रचनाकार थे। उन्होंने साहित्य की अनेक विधाओं में लेखन कर अपनी सृजनात्मक व्यापकता का परिचय दिया। उनके उपन्यास भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों के प्रेरक ग्रंथ हैं।
बिहार सरकार के पूर्व मंत्री सुरेश शर्मा ने स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि वे डॉ. शिवदास पांडेय से नियमित मिलते थे और उनसे मार्गदर्शन प्राप्त करते रहे। गंभीर समस्याओं पर उनके समाधान सदैव कल्याणकारी सिद्ध होते थे। नगर विधायक रंजन कुमार ने कहा कि डॉ. शिवदास पांडेय उनके लिए अभिभावक समान थे और राजनीति में सही दिशा का बोध उन्होंने ही कराया। डॉ. शिवदास पांडेय के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से बोलते हुए संजय पंकज ने कहा कि उनका व्यक्तित्व जितना सहज, सरल और संवेदनशील था, उनका कृतित्व उतना ही सघन, चिंतनप्रधान और व्यापक है। वे प्रेमगीतों के माध्यम से प्रेम की आध्यात्मिकता और चेतना को उजागर करते हैं। परिबंध के प्रवर्तक और व्यंग्यकार के रूप में भी उन्हें विशेष मान मिला। उनके उपन्यास जटिलताओं और विसंगतियों के सांस्कृतिक समाधान प्रस्तुत करते हैं। ‘विचारधारा का सच’ जैसी कृतियां आज भी प्रेरक और पठनीय हैं।
वरिष्ठ लेखिका डॉ. इंदु सिन्हा ने संस्मरण साझा करते हुए कहा कि उनका साहित्य भारतीयता के आलोक से अनुप्राणित है। प्रियवंदा दास ने कहा कि डॉ. शिवदास पांडेय सभी के प्रति सद्भाव रखते थे और यही गुण उन्हें विशिष्ट बनाता है। समारोह में विजय शंकर मिश्र, प्रो. अरुण कुमार सिंह, डॉ. ममता रानी, विजय कुमार जायसवाल, डॉ. विमोहन, लक्षणदेव प्रसाद सिंह, केदारनाथ प्रसाद, डॉ. तारण राय, डॉ. अशोक शर्मा, सुरेंद्र कुमार, डॉ. मोनालिसा, डॉ. प्रियंका त्रिपाठी, बिंदु भारती, सरदार जोगिंदर सिंह गंभीर, डॉ. विनोद कुमार सिन्हा, धनंजय झा, अविनाश कुमार, धीरज श्रीवास्तव और अशोक झा सहित अनेक साहित्यकारों ने अपने उद्गार व्यक्त किए।
सुधा पांडेय के अनुरोध पर आयोजित काव्य-सत्र में संजय पंकज, डॉ. ममता रानी, डॉ. इंदु सिन्हा, जयकांत सिंह जय, शिवग्तुल्लाह हमीदी, अनिता सिंह, सविता राज, देवेंद्र कुमार, मधुमंगल ठाकुर, हरीकिशोर सिंह, सत्यम और वैद्य ललन तिवारी ने गीत, गजल और कविताओं की विविध प्रस्तुतियों से समारोह को उत्कर्ष पर पहुंचाया।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद डॉ. विकास नारायण उपाध्याय ने तथा आभार विवेक वैवस्वत ने व्यक्त किया।