फाइलेरिया पर निर्णायक प्रहार, 11 लाख से अधिक लोगों को खिलाई जाएगी दवा

  • Post By Admin on Feb 08 2026
फाइलेरिया पर निर्णायक प्रहार, 11 लाख से अधिक लोगों को खिलाई जाएगी दवा

लखीसराय : फाइलेरिया रोग के उन्मूलन को लेकर लखीसराय जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लक्ष्य के तहत 10 फरवरी 2026 से सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम की शुरुआत की जा रही है। इस अभियान के अंतर्गत जिले के कुल 11,14,234 लाभार्थियों को फाइलेरिया रोधी दवाएं खिलाई जाएंगी। कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन को लेकर रविवार को सदर अस्पताल सभागार में मीडिया सहयोगियों के लिए संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ राकेश कुमार ने कहा कि फाइलेरिया मुक्त लखीसराय बनाना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि 11 फरवरी को सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर मेगा एमडीए कैंप का आयोजन किया जाएगा, जहां बूथ लगाकर स्वास्थ्यकर्मी समुदाय के सभी लक्षित लाभार्थियों को अपने सामने दवा का सेवन कराएंगे। इसके साथ ही जीविका समूह के सभी सदस्यों को भी मेगा कैंप में दवा खिलाई जाएगी।

उन्होंने बताया कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी अगले 14 दिनों तक घर-घर जाकर छूटे हुए लाभार्थियों को दवा खिलाएंगे, जबकि अंतिम तीन दिनों में सभी स्कूलों में भी बूथ लगाकर दवा सेवन सुनिश्चित किया जाएगा। डॉ राकेश कुमार ने स्पष्ट किया कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और रक्तचाप, शुगर, अर्थराइटिस या अन्य सामान्य रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को भी ये दवाएं लेनी चाहिए। दवा के बाद हल्की मितली या चक्कर आना सामान्य लक्षण हैं, जो यह दर्शाते हैं कि शरीर में मौजूद परजीवी दवा से नष्ट हो रहे हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रत्येक प्रखंड में रैपिड रिस्पांस टीम तैनात रहेगी।

जिला वेक्टर जनित रोग सलाहकार नरेंद्र कुमार ने बताया कि इस अभियान के तहत 580 टीमों द्वारा डीईसी एवं अल्बेंडाजोल की निर्धारित खुराक स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा घर-घर जाकर अपने सामने खिलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि दवाओं का वितरण नहीं किया जाएगा और इन्हें खाली पेट नहीं लेना है। दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को दवा नहीं दी जाएगी। मीडिया से अपील की गई कि वे इस अभियान को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाएं और दवा सेवन के लिए प्रेरित करें।

पिरामल के जिला प्रतिनिधि गौतम कुमार झा ने बताया कि फाइलेरिया या हाथीपांव रोग एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जो संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलती है। यह रोग लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है और इससे हाइड्रोसील, लिम्फेडेमा तथा दूधिया पेशाब जैसी जटिलताएं उत्पन्न होती हैं। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति लगातार पांच वर्षों तक फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन करता है, तो जीवनभर इस रोग से सुरक्षित रह सकता है।

इस अवसर पर सदर अस्पताल प्रबंधक नंद किशोर भारती, वेक्टर जनित नियंत्रण पदाधिकारी शालिनी कुमारी, डब्ल्यूएचओ के जिला प्रतिनिधि अजय कुमार सहित जिला स्तरीय स्वास्थ्य पदाधिकारी, सीफार, पिरामल के प्रतिनिधि एवं मीडिया सहयोगी उपस्थित रहे।