टिकट लेकर गांव में एंट्री, बदले में संस्कृति का अनुभव और मुफ्त भोजन की सुविधा उपलब्ध
- Post By Admin on Feb 01 2026
गाजीपुर: आम तौर पर गांवों में प्रवेश के लिए किसी टिकट की जरूरत नहीं होती, लेकिन उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में एक ऐसा गांव है, जहां एंट्री के लिए ₹20 का टिकट लेना पड़ता है—और बदले में मिलने वाला अनुभव शहरों के म्यूजियम या एम्यूजमेंट पार्क से कम नहीं। यह अनोखा गांव है खुरपी नेचर विलेज, जो प्राचीन भारतीय संस्कृति और आधुनिक सुविधाओं का दुर्लभ संगम पेश करता है।
- शहर जैसी सुविधाएं, गांव वाली आत्मा
जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित खुरपी नेचर विलेज को पारंपरिक भारतीय गांवों की तर्ज पर डिजाइन किया गया है, ताकि आगंतुक अपनी जड़ों से जुड़ाव महसूस कर सकें। यहां कच्चे-खपरैल वाले घर, हरियाली और लोक-कलाओं का सौंदर्य तो है ही, साथ में आधुनिक मनोरंजन और फिटनेस की सुविधाएं भी मौजूद हैं। बच्चों के लिए छोटा सा चिड़ियाघर, युवाओं और वरिष्ठों के लिए ओपन जिम, घुड़सवारी की पगडंडियां और शांत जल में बोटिंग—सब कुछ एक ही परिसर में।
- दीवारें जो बोलती हैं, संदेश जो जोड़ते हैं
पूरे गांव में बनी पेंटिंग्स इसकी पहचान हैं। ये कलाकृतियां न केवल देखने में आकर्षक हैं, बल्कि सामाजिक सरोकार, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय मूल्यों का गहरा संदेश भी देती हैं। मोबाइल और गैजेट्स से दूर, बच्चों को प्रकृति और भारतीय जीवनशैली से परिचित कराने के लिए यह जगह खास मानी जा रही है।
- ₹20 का टिकट, परोपकार का बड़ा उद्देश्य
इस गांव का मकसद केवल पर्यटन नहीं, बल्कि सेवा भी है। यहां ‘प्रभु की रसोई’ के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 100 से 150 जरूरतमंदों को सम्मान के साथ भोजन कराया जाता है। गांव में आने वाले पर्यटकों से मिलने वाली टिकट राशि और दान का बड़ा हिस्सा इसी रसोई में लगाया जाता है। संचालकों का मानना है कि आसपास कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए—यही इस पहल की आत्मा है।
- देशभर में बन रहा मिसाल
सेवा-भाव, सांस्कृतिक संरक्षण और ग्रामीण पर्यटन के इस अभिनव मॉडल ने खुरपी नेचर विलेज को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। ₹20 का टिकट यहां केवल प्रवेश शुल्क नहीं, बल्कि एक ऐसे विचार में योगदान है, जहां घूमना, सीखना और सेवा—तीनों साथ चलते हैं।