मुजफ्फरपुर जंक्शन पर मंदिर विध्वंस का मामला पकड़ा तूल, आत्मदाह की चेतावनी से हड़कंप
- Post By Admin on Feb 07 2026
मुजफ्फरपुर : मुजफ्फरपुर जंक्शन के उत्तरी परिसर में स्थित आजादी से पूर्व के दो प्राचीन मंदिरों को तोड़े जाने का मामला एक बार फिर तूल पकड़ता नजर आ रहा है। मंदिर पुनर्स्थापना की मांग को लेकर बीते एक वर्ष से लगातार प्रयास कर रहे भक्तों ने अब इसे आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए केंद्र सरकार से सीधे हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।
भक्तों का कहना है कि जंक्शन के उत्तरी परिसर में पूर्व से शिव परिवार का मंदिर तथा माँ दुर्गा एवं पंचमुखी हनुमान मंदिर स्थित था, जिसमें लगभग आठ फीट ऊंची पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमा विराजमान थी। ये मंदिर न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं, बल्कि जंक्शन पर आने-जाने वाले यात्रियों के लिए भी आस्था का केंद्र थे। भक्तों का दावा है कि उक्त मंदिर रेलवे की भूमि पर नहीं, बल्कि बिहार सरकार की भूमि पर खाता संख्या 355, खेसरा संख्या 177, वार्ड संख्या 07, नगर पालिका मुजफ्फरपुर में स्थित थे, जो खतियान में शिव मंदिर के नाम से दर्ज है।
आरोप है कि 10 मार्च 2025 की रात करीब दो बजे बिना किसी पूर्व सूचना के भारी संख्या में हथियारबंद पुलिस बल ने पूरे इलाके को घेर लिया। रेल प्रशासन की मौजूदगी में भारी मशीनों के जरिए मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया और शिव परिवार, माँ दुर्गा तथा पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमाओं को तोड़कर हटा दिया गया। इस कार्रवाई से श्रद्धालुओं में गहरा आक्रोश और पीड़ा व्याप्त है।
मंदिर पुनर्स्थापना को लेकर भक्तों द्वारा कई स्तरों पर प्रयास किए गए। 17 मार्च 2025 को शहरव्यापी मार्च निकालकर रेल प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। 21 मार्च 2025 को जिले के मठ-मंदिरों के पुजारियों, हिंदू संगठनों और श्रद्धालुओं के सहयोग से स्वैच्छिक बंद भी किया गया तथा रेल मंत्री के नाम पुनः ज्ञापन दिया गया। इसके बाद स्थानीय सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री राजभूषण चौधरी के साथ मंडल रेल प्रबंधक और भक्तों की वार्ता हुई, जिसमें मंदिर पुनर्स्थापना का आश्वासन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी।
भक्तों ने यह भी बताया कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के बिहार दौरे के दौरान कर्पूरीग्राम में उनसे मुलाकात कर इस विषय में आग्रह पत्र सौंपा गया। वहीं संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान दिल्ली जाकर रेल मंत्री से मिलने के प्रयास भी किए गए, लेकिन हर बार निराशा हाथ लगी।
अब भक्तों ने अंतिम उम्मीद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जताई है। उन्होंने मांग की है कि मुजफ्फरपुर जंक्शन के आधुनिकीकरण और विकास कार्यों के साथ-साथ तोड़े गए मंदिरों को भी पुनः उसी स्थान पर शामिल कर निर्माण का आदेश 9 फरवरी 2026 तक दिया जाए, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था को न्याय मिल सके।
इधर, मंदिर पुनर्स्थापना संघर्ष से जुड़े अनिल कुमार ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो 10 फरवरी 2026 को वे उसी स्थान पर, जहां मंदिर तोड़े गए थे, आत्मदाह जैसा कदम उठाने को मजबूर होंगे। इस बयान के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल देखी जा रही है।
फिलहाल मामला आस्था, कानून और प्रशासनिक निर्णयों के टकराव का रूप ले चुका है और आने वाले दिनों में इस पर सरकार तथा रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।