नई शिक्षा नीति और भारतीय शिक्षा दर्शन के क्रियान्वयन पर चार सत्रों में हुआ गहन विमर्श
- Post By Admin on Jul 12 2026
मुजफ्फरपुर : विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान एवं विद्या भारती बिहार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित क्षेत्रीय आचार्य स्थायित्व प्रशिक्षण वर्ग के तीसरे दिन भारतीय शिक्षा दर्शन, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, तैत्तिरीय उपनिषद के पंचकोश एवं पंचपदी सिद्धांत, शैक्षिक नेतृत्व तथा शिक्षकों के व्यावसायिक विकास जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। चारों शैक्षणिक सत्रों में देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय पर अपने विचार साझा करते हुए आचार्यों का मार्गदर्शन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। विभाग निरीक्षक राजेश कुमार रंजन ने मुख्य वक्ताओं का अंगवस्त्र भेंटकर स्वागत किया। प्रशिक्षण वर्ग का संचालन भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, सदातपुर के प्राचार्य डॉ. राकेश कुमार पाल ने किया।
प्रथम सत्र में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के क्षेत्रीय संयोजक प्रो. रमन कुमार त्रिवेदी ने "राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 : समग्र एवं बहुविषयक शिक्षा" विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि संस्कारित, आत्मनिर्भर, चरित्रवान और राष्ट्रनिष्ठ नागरिकों का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, आधुनिक विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार तथा बहुविषयक शिक्षा का समन्वय नई शिक्षा नीति की सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने आचार्यों से सतत अध्ययनशील, शोधोन्मुख और मूल्यनिष्ठ बनने का आह्वान किया।
द्वितीय एवं तृतीय सत्र में विद्या भारती के वरिष्ठ शिक्षाविद उमा शंकर पोद्दार ने छात्रों के समग्र विकास में पंचकोश की भूमिका तथा तैत्तिरीय उपनिषद में वर्णित पंचपदी शिक्षण पद्धति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बौद्धिक विकास नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि पंचपदी शिक्षण पद्धति—अधीति, बोध, अभ्यास, प्रयोग एवं प्रसार—विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ संस्कार, आत्मविश्वास, सामाजिक उत्तरदायित्व और नेतृत्व क्षमता का विकास करती है।
दिन के अंतिम सत्र में राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (एनआईईपीए), नई दिल्ली के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शंकर परिपल्ली ने "शैक्षिक नेतृत्व एवं शिक्षकों का व्यावसायिक विकास" विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षक की भूमिका केवल कक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। उन्हें प्रभावी शैक्षिक नेतृत्व, डिजिटल दक्षता, अनुसंधान, नवाचार और सतत व्यावसायिक विकास को अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि मूल्याधारित और सहभागितापूर्ण नेतृत्व ही उत्कृष्ट शिक्षण संस्थानों की पहचान है।
प्रशिक्षण वर्ग के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, भारतीय ज्ञान परंपरा, पंचकोश, पंचपदी, समग्र शिक्षा तथा शैक्षिक नेतृत्व जैसे विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। प्रतिभागी आचार्यों ने अपने-अपने संस्थानों में इन अवधारणाओं को व्यवहार में उतारकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष रजनीश कुमार गुप्ता, सहसचिव डॉ. ललित किशोर, विभाग निरीक्षक राजेश कुमार रंजन सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एवं शिक्षाविद उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में विभाग निरीक्षक राजेश कुमार रंजन ने सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया। समूह चर्चा, अनुभव साझा करने तथा "वंदे मातरम्" के सामूहिक गायन के साथ प्रशिक्षण वर्ग के तीसरे दिन का सफल समापन हुआ।