टीबी मुक्त भारत मिशन को रफ्तार, 11 हजार गांवों में चलेगा व्यापक स्क्रीनिंग अभियान

  • Post By Admin on Apr 16 2026
टीबी मुक्त भारत मिशन को रफ्तार, 11 हजार गांवों में चलेगा व्यापक स्क्रीनिंग अभियान

लखीसराय : राज्य में टीबी उन्मूलन को लेकर एक बड़ा और निर्णायक अभियान शुरू किया गया है। विश्व टीबी दिवस के अवसर पर प्रारंभ हुए ‘100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान’ के तहत बिहार में व्यापक स्तर पर जांच, जागरूकता और उपचार की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य टीबी के नए मामलों की पहचान कर इसके प्रसार को पूरी तरह समाप्त करना है।

जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. श्री निवास शर्मा ने बताया कि राज्य के 11,055 उच्च जोखिम वाले गांवों और वार्डों में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह अभियान केवल मरीजों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि 37 प्रकार के संवेदनशील समूहों को सुरक्षा कवच प्रदान करते हुए जनभागीदारी के माध्यम से टीबी उन्मूलन को गति देने का प्रयास है। इसके तहत मेडिकल कॉलेजों से लेकर आयुष्मान आरोग्य केंद्रों तक करीब 34.5 लाख लोगों की जांच का लक्ष्य रखा गया है।

टीबी जांच को तेज और सुलभ बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। राज्यभर में 185 अल्ट्रा-पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों के जरिए दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में भी सटीक जांच सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही 91 सीबीनेट और 560 ट्रूनेट मशीनें सक्रिय हैं, जिनसे जांच प्रक्रिया को गति मिल रही है। लखीसराय जिले में भी एक सीबीनेट, छह ट्रूनेट और दो हैंडहेल्ड मशीनें उपलब्ध हैं। रेडियोग्राफरों को प्रतिदिन कम से कम 100 एक्स-रे करने का लक्ष्य दिया गया है।

अभियान के दौरान मोबाइल स्वास्थ्य टीम गांव-गांव जाकर स्क्रीनिंग करेगी। टीबी के साथ-साथ मधुमेह, रक्तचाप, हीमोग्लोबिन और शरीर द्रव्यमान सूचकांक (बीएमआई) की भी जांच की जा रही है, क्योंकि कुपोषण और मधुमेह के मरीजों में टीबी का खतरा अधिक होता है।

गंभीर मरीजों के लिए सरकार ने ‘डिफरेंशिएटेड टीबी केयर’ के तहत जिला अस्पतालों में कम से कम दो बेड आरक्षित करने के निर्देश दिए हैं। सांस लेने में तकलीफ या तेज बुखार जैसे लक्षणों वाले मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर भर्ती किया जाएगा। मरीजों की हर महीने 16 स्वास्थ्य मानकों पर निगरानी की जाएगी। ‘निक्षय पोषण योजना’ के तहत मरीजों को प्रतिमाह 1000 रुपए की सहायता राशि उनके खाते में भेजी जा रही है, वहीं ‘निक्षय मित्र’ के माध्यम से पोषण युक्त खाद्य सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।

अभियान के दौरान उच्च जोखिम वाले समूहों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इनमें पूर्व टीबी मरीज, उनके परिजन, एचआईवी, कैंसर, किडनी रोगी, ट्रांसप्लांट मरीज, जेलों और हॉस्टलों में रहने वाले लोग, खदान और निर्माण कार्य में लगे मजदूर, कुपोषित बच्चे, बुजुर्ग और धूम्रपान करने वाले शामिल हैं। इनकी जांच ‘10 लक्षण’ आधारित पद्धति से की जा रही है।

अभियान की प्रभावी निगरानी के लिए जिला स्तर पर सिविल सर्जन एवं अन्य अधिकारियों द्वारा नियमित समीक्षा की जा रही है। सभी प्रखंडों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट ‘निक्षय पोर्टल’ पर अपलोड करें, ताकि अभियान को समयबद्ध और सफल बनाया जा सके।

राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयासों से यह अभियान टीबी मुक्त बिहार के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।